


न्यूज़ 13 ब्यूरो
न्यूज़ 13 ब्यूरो/ देशभर के रसोई घरों से अब धीरे-धीरे रसोई गैस सिलेंडर गायब होने वाले हैं सरकार अब एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) यानी लाल वाले गैस सिलेंडर के बजाय पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने के लिए पूरी ताकत से जुट गई है। हर जिले में बहुत ही तेजी के साथ पीएनजी का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। इसी बीच अब शासन की तरफ से एक ऐसा बड़ा आदेश जारी हुआ है जिसने एलपीजी इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और गैस एजेंसी मालिकों के बीच खलबली मचा दी है।
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सरकार ने साफ आदेश दिए हैं कि एलपीजी का इस्तेमाल करने वाले शत-प्रतिशत 100 फीसदी उपभोक्ताओं के घरों तक जल्द से जल्द पाइप वाली पीएनजी गैस पहुंचाई जाए। इस नए नियम के तहत जैसे ही आपके घर में पीएनजी गैस चालू होगी आपको अपना पुराना एलपीजी गैस कनेक्शन सरेंडर यानी हमेशा के लिए वापस करना होगा। इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को तो बार-बार सिलेंडर बुक करने और उसके खत्म होने के झंझट से बड़ी राहत मिलेगी परन्तु देश की तमाम गैस एजेंसियों पर हमेशा के लिए ताला लगने का बड़ा संकट आ गया है। इसके साथ ही इन एजेंसियों में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी और आपके घरों तक भारी सिलेंडर पहुंचाने वाले डिलीवरीमैन भी बेरोजगार हो जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध बना बड़ी वजह, सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
इस अचानक आए बड़े फैसले के पीछे दुनिया में चल रहा भारी तनाव है। दरअसल अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर चल रहे भयंकर युद्ध का सबसे बुरा और सीधा असर पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ा है।
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इस युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारत आने वाली एलपीजी की सप्लाई काफी ज्यादा प्रभावित हुई है यही वजह है कि अब सरकार का पूरा फोकस स्वदेशी और सुरक्षित पीएनजी गैस पर टिक गया है।इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को एक बेहद जरूरी और कड़ा पत्र भेजा है। इस सरकारी पत्र में साफ तौर पर आदेश दिए गए हैं कि सभी एलपीजी उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द पीएनजी में शिफ्ट कराया जाए। इस पत्र में यह भी बताया गया है कि युद्ध के चलते ‘होर्मुज जलडमरु मध्य वाले समुद्री क्षेत्र में जो हालिया हिंसक घटनाएं हुई हैं उसकी वजह से एलपीजी पर भारत की निर्भरता को कम करना बेहद जरूरी हो गया है। इसीलिए खाना पकाने के ईंधन के रूप में पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए तुरंत और प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की गैस एजेंसियों के मालिकों और उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करें और उपलब्धता के आधार पर एलपीजी उपभोक्ताओं को 100 फीसदी पीएनजी पर शिफ्ट करने की तत्काल कार्रवाई शुरू कर दें।
बंद होने की कगार पर गैस एजेंसियां संचालकों ने बयां किया अपना दर्द
सरकार के इस नए फरमान के बाद गैस एजेंसी संचालकों के सामने अपने भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि गैस एजेंसी का बिजनेस अब पहले की तरह मुनाफे वाला काम नहीं रह गया है क्योंकि पिछले कई सालों से एजेंसियों के कमीशन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। अब ऊपर से पीएनजी के आ जाने से एजेंसियों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है।
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इस मामले पर रामपुर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के अध्यक्ष अमित दिवाकर ने कहा अगर धीरे-धीरे सभी एलपीजी ग्राहक पीएनजी में बदल जाएंगे तो गैस एजेंसी चलाने वालों के सामने रोजी-रोटी की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। उनका कहना है कि एक गैस एजेंसी से सिर्फ मालिक का नहीं बल्कि वहां काम करने वाले 20 से 25 कर्मचारियों के परिवारों का भी भरण पोषण होता है इसलिए सरकार को इन बेसहारा होने वाले कर्मचारियों के बारे में भी कोई ठोस विचार जरूर करना चाहिए।इसी प्रकार टांडा गैस सर्विस के अंकित जैन ने इस बदलाव की कानूनी हकीकत बताते हुए कहा कि पीएनजी की यह व्यवस्था बड़े-बड़े महानगरों में तो पहले से ही चल रही थी परन्तु केंद्र सरकार ने 14 मार्च 2026 को एक नई अधिसूचना जारी करके इसे पूरे देश में एक स्पष्ट कानूनी नियम के रूप में लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत अब हर उस ग्राहक को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना ही होगा जिसके घर तक पीएनजी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है। दूसरी ओर सरकारी मंशा को अमलीजामा पहनाने के लिए कंपनियां भी दिन-रात काम में जुटी हुई हैं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एरिया मैनेजर नीरज कुमार ने बताया कि सरकार का पूरा जोर अब पीएनजी नेटवर्क को फैलाना है। राज्य सरकार की इच्छा के अनुसार जिलों में बहुत तेजी से पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है और अकेले उनके क्षेत्र में ही पीएनजी के लगभग दो हजार से ज्यादा नए कनेक्शन चालू भी किए जा चुके हैं।














