उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के 30 से ज्यादा विधायकों की टिकट पर लटकी तलवार जनता नहीं है काम से खुश।

न्यूज़ 13 प्रतिनिधि देहरादून

देहरादून/ उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के संगठन और संघ के स्तर पर कराए गए आंतरिक सर्वे में बड़ा संकेत मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की 47 विधानसभा सीटों पर कराए गए फीडबैक में 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पार्टी इस फीडबैक के आधार पर कई सीटों पर नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक लोगों में सरकार की तुलना में स्थानीय विधायकों के प्रति अधिक असंतोष देखने को मिला है।

यह भी पढ़ें 👉दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण कार्यों का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई के दिए निर्देश।

सर्वे में विकास कार्यों की सराहना के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यशैली, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपलब्धता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर नाराजगी दर्ज होने की बात कही गई है।

 सरकार से नहीं स्थानीय विधायकों से है जनता नाराज

आंतरिक फीडबैक के अनुसार राज्य में सरकार के कामकाज को लेकर अपेक्षाकृत कम असंतोष है परन्तु कई क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं।

यह भी पढ़ें 👉मौसम विभाग ने किया अलर्ट जारी उत्तराखंड के कई जिलों भारी बारिश के साथ बिजली गिरने का ख़तरा।

पार्टी संगठन इन शिकायतों को दूर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी के लिए सुरक्षित सीट पर भी चर्चा

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए एक सुरक्षित विधानसभा सीट के विकल्प पर भी विचार कर रहा है ताकि वे पूरे राज्य में चुनाव प्रचार पर अधिक ध्यान दे पाए। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे।

यह भी पढ़ें 👉उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं के लिए अच्छी खबर आयोग ने 1631 पदो पर भर्ती शड्यूल किया जारी।

जबकि बाद में उन्होंने चंपावत उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी।

कमजोर विपक्ष के बाद भी भाजपा है सतर्क

सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनावी जीत-हार में केवल विपक्ष की मजबूती या कमजोरी ही निर्णायक नहीं होती बल्कि स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार के प्रति जनता की राय अधिक प्रभाव डालती है। इसी कारण संगठन इस बार उम्मीदवार चयन में फीडबैक को विशेष महत्व दे सकता है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पिछली बार हारी 23
सीटों में से लगभग 10 सीटों पर भाजपा की स्थिति पहले से बेहतर मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *