अल्मोडा/ राज्य की वार्षिक आडिट रिपोर्ट तीन साल से विधान सभा के पटल पर नहीं आई है । यह रिपोर्ट सिर्फ फाइलों में ही कैद होकर रह गई हैं । किस विभाग में कितना बजट आया, कहां खर्च हुआ कहां बर्बादी हुई किसी को कोई खबर नहीं है। यहां ग्राम सूपाकोट के मूल निवासी रिटायर्ड असिस्टेंट आडिट आफिसर रमेश चन्द्र पाण्डे ने आडिट एक्ट के उल्लंघन के इस गम्भीर मामले में सत्तापक्ष के साथ ही विपक्ष की चुप्पी पर भी गहरी हैरानी व्यक्त की है ।
उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आडिट एक्ट का जवाबदेही के साथ परिपालन सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है ।
दरअसल उत्तराखण्ड लेखा परीक्षा अधिनियम 2012 के नियम 8(3) में प्रावधान है कि निदेशक लेखा की एक संहत लेखा परीक्षा(आडिट) रिपोर्ट तैयार करेगा या करवायेगा और उसे विधान सभा के पटल पर रखने के लिए हर साल राज्य सरकार को भेजेगा । इस नियम के तहत वर्षवार आडिट रिपोर्ट सदन के पटल पर नहीं रखी जा रही है।
इस स्थिति पर सवाल उठने के बाद सरकार ने वर्ष 2014-15 से 2021-22 तक 8 साल की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी थी लेकिन अब 2021-22 से 2024-25 तक 3 साल की आडिट रिपोर्ट सदन के पटल पर नहीं पहुंची हैं । अब फिर से रिटायर्ड असिस्टेंट आडिट आफिसर ने मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में यह भी कहा है कि आडिट आपत्तियों के निस्तारण हेतु एक्ट की धारा 9(5)(ख) में निहित प्राविधान के अनुरुप विभिन्न स्तर की कमेटियां तो गठित हैं लेकिन उनकी नियमित बैठक नहीं हो रही है ।कहा गया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय समिति की बैठक लम्बी अवधि से नहीं हुई है जिससे 600 करोड की चर्चित चावल घोटाले जैसी कई स्पेशल आडिट रिपोर्ट के प्रस्तरों के निस्तारण की कार्यवाही लम्बित पड़ी है।
पाण्डे का कहना है कि सभी विभागों के आडिट में उजागर हुई अनियमितता और गबन से सम्बन्धित आपत्तियों को संकलित कर हर साल की आडिट रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती तो इसकी समीक्षा होती और सुधार व नियन्त्रण के लिए सदन में ठोस कदम उठाने पर विचार होता । उन्होंने कहा कि इस स्थिति के चलते जीरो टॉलरेंस के दावों पर उठने वाले सवालों से बचने के लिए सरकार को यह समझना होगा कि कायदे कानून की अनदेखी के मामले में जवाबदेही तय करना कितना जरुरी है। इधर राज्य के वरिष्ठतम विधायक बंशीधर भगत ने श्री पाण्डे के पत्र को गम्भीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को पत्र भेजा है । एक्ट के उल्लंघन से सरकार की छवि पर पड रहे प्रतिकूल प्रभाव पर नाराजगी जाहिर करते हुए भगत ने एक्ट का परिपालन सुनिश्चित करने को कहा है । विधायक बंशीधर भगत ने 2012 से अब तक जारी स्पेशल आडिट रिपोर्ट एवं उनके परिपालन की स्थिति का पूरा ब्यौरा मांगा है ।