उखीमठ/ जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को आईना दिखाते हुए मदमहेश्वर घाटी के गैड़ ग्राम पंचायत के बष्टी तोक में ग्रामीणों ने खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठा लिया है। पिछले 10 सालों से मोटर मार्ग का इंतेज़ार कर रहे इन ग्रामीणों की जब शासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो मंगलवार को पूरे गांव ने एकजुट होकर हाथों में फावड़े कुदाल और गैंती थाम ली।
सड़क न होने की वजह से स्थानीय ग्रामीणों को रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ अपने कृषि उत्पादों को मुख्य बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था जिससे उनकी आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही थी। व्यवस्था की इस सुस्ती और उपेक्षा से परेशान होकर ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान के जरिए 2 किलोमीटर लंबे मार्ग को खुद ही तैयार करने का यह साहसिक कदम उठाया है। इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा है कि कलका गाड़ से बष्टी तक इस 2 किमी मोटरमार्ग की कागजी कार्रवाई पिछले तीन सालों से प्रक्रिया में है।
विभाग के मुताबिक प्रस्तावित मार्ग के बीच में बांज के हरे पेड़ों की संख्या अत्यधिक होने के कारण वन विभाग से मिलने वाली आवश्यक स्वीकृतियों की फाइलों में समय लग रहा है। हालांकि ग्रामीणों के इस कड़े रुख के बाद अधिकारियों ने दावा किया है कि अगले 15 दिनों के अंदर वन विभाग से जुड़ी सभी मंजूरियां और जरूरी कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी जिसके बाद सरकारी स्तर पर सड़क निर्माण काकाम आगे बढ़ाया जाएगा। अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों का यह स्वावलंबी कदम सोए हुए सिस्टम को कितनी जल्दी जगा पाता है।