भिकियासैंण विकास खंड के ग्राम खुरेडी में आस्था के नाम पर लूट 10 दिन जागर लगाने के जगरिए ने लूट लिए 60 हजार, पीड़ित ने सुनियोजित लूट को रोकने के लिए जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन।

न्यूज 13 प्रतिनिधि अल्मोड़ा

अल्मोड़ा/ भिकियासैंण ब्लॉक के अंतर्गत_ग्राम खुरेड़ी में आस्था के नाम पर आर्थिक शोषण एवं बेजुबान पशु बलि प्रथा पर नियंत्रण हेतु वरिष्ठ समाजसेवी के. एस. बिष्ट द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री मुख्य सचिव जिलाधिकारी मुख्य सचिव, उप जिलाधिकारी भिकियासैंण को ज्ञापन सौंपा है ज्ञापन में आरोप लगाया है ।ग्राम खुरेड़ी जिला अल्मोड़ा, तहसील भिकियासैंण में गत दिनों में एक धार्मिक आयोजन जगरिया’ द्वारा समुदाय विशेष को आस्था के नाम पर आर्थिक रूप से शोषित किया गया।

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व बेजुबान पशु बलि प्रथा को बढ़ावा दिया गया, जो पशु अधिकारों और मानवीय मूल्यों के विरुद्ध है।. एक परिवार से साठ हजार की अवैध धनराशि केवल ‘जागर’ गाने के नाम पर वसूली गई, जो सामान्य ग्रामीण परिवार की सामर्थ्य से परे है। 10 दिनों की पूजा में प्रतिदिन सुबह-शाम दो जागर होती हैं और एक जागर का शुल्क तीन हजार माना जाए, तब ₹60,000 की राशि बनती है। यह एक सुनियोजित आर्थिक दोहन प्रतीत होता है। जब कि आम मजदूर की दैनिक न्यूनतम मजदूरी ग्रामीण क्षेत्र में ₹300–₹500 होती है, तो ‘जगरिया’ द्वारा ली जा रही यह राशि किस दर पर आधारित है?

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जगरिया के 3 घंटे रात्रि मात्र का कितना शुल्क दर निर्धारित किया जाना चाहिए। ज्ञापन में कहां गया है कि उक्त घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए एवं दोषियों पर कार्यवाही की जाए।राज्य में आस्था के नाम पर होने वाली ऐसी गतिविधियों के लिए दरों की अधिकतम सीमा निर्धारित की जाए।. बेजान बलि प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो और इसका उल्लंघन करने वालों पर कठोर दंड दिया जाए। ग्रामसभाओं को इस प्रकार के आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए। प्रदेश में एक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।

पीड़ित का ज्ञापन पत्र व मांगे 

प्रेषक
श्री के. एस. बिष्ट ग्राम-खुरेड़ी, तहसील भिकियासैंण जिला अल्मोड़ा, उत्तराखंड

विषय- ग्राम खुरेड़ी में आस्था के नाम पर आर्थिक शोषण एवं बेजान पशु बलि प्रथा पर नियंत्रण हेतु सख्त निर्देश पारित करने की विनती।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मेरा पैतृक ग्राम खुरेड़ी (जिला अल्मोड़ा, तहसील भिकियासैंण) में हाल ही में एक धार्मिक आयोजन के दौरान तथाकथित ‘जगरिया’ द्वारा समुदाय विशेष को आस्था के नाम पर आर्थिक रूप से शोषित किया गया। इस आयोजन में

1- बेजान (निर्जीव) पशु बलि प्रथा को बढ़ावा दिया गया, जो पशु अधिकारों और मानवीय मूल्यों के विरुद्ध है।_

2- एक परिवार से ₹60,000 की अवैध धनराशि केवल ‘जागर’ गाने के नाम पर वसूली गई, जो सामान्य ग्रामीण परिवार की सामर्थ्य से परे है।_

3- यदि 10 दिनों की पूजा में प्रतिदिन सुबह-शाम दो जागर होती हैं और एक जागर का शुल्क ₹3000 माना जाए, तब ₹60,000 की राशि बनती है। यह एक सुनियोजित आर्थिक दोहन प्रतीत होता है।_

महत्वपूर्ण प्रश्न यह है

जब उत्तराखंड में एक आम मजदूर की दैनिक न्यूनतम मजदूरी ₹300–₹500 होती है, तो ‘जगरिया’ द्वारा ली जा रही यह राशि किस दर पर आधारित है? जगरिया के 3 घंटे रात्रि मात्र का कितना शुल्क दर निर्धारित किया जाना चाहिए। एक आम व्यक्ति की मजदूरी आय पर आधारित होनी चाहिए क्या इसके लिए कोई पंचायत या जिला स्तर पर शुल्क दर निर्धारण किया गया है?_

हमारी माँगें

1- उक्त घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए एवं दोषियों पर कार्यवाही की जाए।

2- उत्तराखंड राज्य में आस्था के नाम पर होने वाली ऐसी गतिविधियों के लिए दरों की अधिकतम सीमा निर्धारित की जाए।

3- बेजान बलि प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो और इसका उल्लंघन करने वालों पर कठोर दंड दिया जाए।_

4- ग्रामसभाओं को इस प्रकार के आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए।_

5- एक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए जिससे आम ग्रामीण इन आस्थाओं की आड़ में हो रहे आर्थिक शोषण से सतर्क रहें।

आपसे अनुरोध है कि इस विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही की जाए जिससे भविष्य में कोई भी परिवार ऐसी मनमानी और शोषण का शिकार न हो।_

 संलग्न: घटना का विवरण, गवाहों के नाम, सहित अनुमानित वसूली राशि का विवरण के साथ उल्लेख हो तो अधिक उचित रहेगा।

भवदीय

वरिष्ठ समाजसेवी
श्री के. एस. बिष्ट
स्थान- ग्राम खुरेड़ी, जिला अल्मोड़ा
वर्तमान निवास दिल्ली

प्रति
1- मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार_
2- मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार_
3- जिलाधिकारी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड सरकार_
4- उप-जिलाधिकारी, तहसील, भिकियासैंण जिला-अल्मोड़ा

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