चमोली/ उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की ओर शुक्रवार को जिला सभागार में जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आयोग की सदस्य विजया रावत और दर्शनी पंवार ने 5 महिलाओं की महिलाओं की समस्याएं सुनी। उन्होंने मामलों के निस्तारण के लिए विभिन्न विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
जिला सभागार में आयोजित जन सुनवाई के दौरान महिलाओं की ओर से घरेलू हिंसा, भरण पोषण, भूमि विवाद, महिलाओं से जुड़े कार्यालयी विवाद के मामलों की सुनवाई की गई। जिसमें आयोग के सदस्यों की ओर वन स्टॉप सेंटर, समाज कल्याण विभाग, पुलिस व अन्य विभागों को मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं विधि सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ताओं से पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान करने की बात कही।
आयोग की सदस्य विजया रावत ने कहा कि जन सुनवाई कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मुहैया करवाना है। उन्होंने इस दौरान बालिका सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के जागरूक होने की बात पर जोर दिया। कहा कि अभिभावकों को बच्चों के परिवेश और आसपास के माहौल की जानकारी होने पर उन्हें किसी मुश्किल में पड़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ ही सरकार की ओर किए गए प्रावधानों की भी जानकारी होना आवश्यक है।
आयोग की सदस्य दर्शनी पंवार ने कहा महिला सुरक्षा और जागरूकता को लेकर आयोग की ओर से राज्य में जन सुनवाई के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र खंतवाल, रेजा चौधरी और गीता बिष्ट ने महिला कानूनों की जानकारी देने के साथ ही पीड़ितों को समस्याओं के समाधान के लिए कानूनी परामर्श भी दिए। इस मौके पर तसीलदार चमोली दीप्ति शिखा, खंड शिक्षा अधिकारी पंकज उप्रेती, सीडीपीओ ज्योतिर्मठ अभिजीत कुमार, अंजली रावत, एसआई मीतू गुसाईं, किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य शांति राणा, सुरेंद्र रावत सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।