श्रीनगर/ उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल से एक दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहा गढ़वाल मंडल विकास निगम इण्डेन गैस एजेंसी के प्रबंधक दीपक तोमर ने अत्यधिक मानसिक तनाव के चलते अपने हाथ की नस काटकर आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया। उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वक्त से रसोई गैस की भारी किल्लत चल रही है।
इस आपूर्ति संकट के कारण गैस एजेंसी के कर्मचारियों और प्रबंधकों पर उपभोक्ताओं का भारी दबाव बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इसी तनाव के चलते प्रबंधक दीपक तोमर ने यह खौफनाक कदम उठाया।
मां का छलका दर्द रात 11 बजे तक कर रहे थे ड्यूटी
दीपक की माताजी ने इस स्थिति पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है। उनके मुताबिक
अत्यधिक कार्यभारः गैस की कमी के कारण दीपक पर काम का इतना बोझ था कि वह रात के 11 बजे तक दफ्तर में काम कर रहे थे। उपभोक्ताओं का आक्रोशः
सिलेंडर न मिलने के कारण परेशान उपभोक्ता लगातार एजेंसी प्रबंधक पर दबाव बना रहे थे और उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे। मानसिक प्रताड़ना>> मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटते-पाटते दीपक मानसिक रूप से टूट चुके थे।
दीपक तोमर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहा डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
यह घटना सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। गैस किल्लत जैसी समस्याओं के लिए एक निचले स्तर के कर्मचारी या प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराना और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना किस हद तक सही है?