देहरादून/ उत्तराखंड में बारिश का दौर एक बार फिर जोर पकड़ सकता है पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक अगले कुछ दिनों में मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 29 अगस्त से 2 सितंबर तक राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में पहले से बारिश और भूस्खलन की मार झेल रहे पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।
अगले 48 घंटों में इसके और स्पष्ट होकर आगे बढ़ने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर मानसून टर्फ अमृतसर से इस सिस्टम तक फैली हुई है जबकि उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है।
मौसम के इन तीन सिस्टमों के एक साथ असर से उत्तराखंड में बारिश की रफ्तार बढ़ने का अनुमान है।
30 अगस्त को इन जिलों में येलो अलर्ट
देहरादून, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में भारी बारिश के साथ तीव्र से अति तीव्र बारिश के दौर की संभावना जताई गई है।
31 अगस्त को ऑरेंज अलर्ट
31 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश का येलो अलर्ट है।
1 और 2 सितंबर को भी राहत के आसार कम
मौसम विभाग के मुताबिक 1 और 2 सितंबर को भी देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार में भारी बारिश हो सकती है।
पहाड़ों में बढ़ सकता है खतरा
भारी बारिश सिर्फ सड़कों पर पानी भरने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मलबा आने का खतरा भी बढ़ सकता है। कई सड़कें और राजमार्ग बाधित हो सकते हैं।
निचले क्षेत्रों में जलभराव के साथ नदी-नालों और गदेरों में अचानक पानी बढ़ने यानी फ्लैश फ्लड का खतरा भी बना रहेगा। बारिश से कच्चे मकानों, निर्माणाधीन पुलों और धान-मक्का जैसी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। बिजली और पानी की सप्लाई के साथ हवाई सेवाएं भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
चारधाम यात्रा को लेकर भी सावधानी
मौसम विभाग ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। चारधाम यात्रा केवल बेहद जरूरी होने पर ही करने की सलाह दी गई है। तीव्र ढलान वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने और नदी, नालों व निचले क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।
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