देहरादून/ राज्य में आईएफएस अफसरों की सूची को मुख्यमंत्री के अनुमोदन का इंतजार है. इस बार महकमे में वन मुख्यालय से लेकर फील्ड के बड़े अफसरों तक को भी बदला जा रहा है. इसके लिए सिविल सर्विस बोर्ड से लेकर विभागीय मंत्री तक ने हरी झंडी दे दी है. हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को काफी गोपनीय रखने की कोशिश की गई थी, लेकिन बावजूद इसके ईटीवी भारत के पास IFoS अफसरों की सूची को लेकर काफी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंची है।
उत्तराखंड में आईएफएस अफसरों का स्थानांतरण को लेकर चला आ रहा इंतजार अब जल्द खत्म होने जा रहा है. दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को तबादला सूची में अंतिम अनुमोदन देना है. इसके लिए जल्द ही इससे जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री के सम्मुख प्रस्तुत की जाएगी. इससे पहले सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक में सूची पर बातचीत हो चुकी है. साथ ही विभागीय मंत्री भी फाइल पर अनुमोदन दे चुके हैं. अब बस मुख्यमंत्री के अंतिम अनुमोदन का ही इंतजार रह गया है. इसके बाद स्थानांतरण सूची को जारी कर दिया जाएगा।
शासन से लेकर विभागीय मंत्री ने गोपनीय रखी प्रक्रिया:-
प्रदेश में आईएफएस अधिकारियों के तबादले को लेकर इस बार बेहद ज्यादा गोपनीयता रखी गई. इसके पीछे क्या कारण रहे यह कहना मुश्किल है, लेकिन शासन से लेकर विभागीय मंत्री के कार्यालय तक में तबादला प्रक्रिया की गोपनीयता पर विशेष फोकस दिखाई दिया. संभवतया सिफारिशी अफसरों को सिफारिश का कोई मौका ना मिले, इसके प्रयास हो सकते हैं. लेकिन यदि ऐसा भी है तो ये सिस्टम की कमजोरी को बयां करते हैं. बहरहाल हकीकत क्या रही ये तो तबादला प्रक्रिया के हिस्सा रहे अफसर ही बता सकते हैं।
आईएफएस अफसरों की आने वाली तबादला सूची में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बदलाव होने वाले हैं. ईटीवी भारत के पास मौजूद जानकारी के अनुसार कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व दोनों में ही निदेशक पद पर बदलाव होने वाला है. IFoS पीके पात्रो को कुमाऊं चीफ पद से हटाए जाने के बाद अतिरिक्त चार्ज के रूप में चल रहे इस पद पर स्थायी तैनाती दी जाएगी।
गढ़वाल चीफ के पद पर कई अधिकारियों की नजर रही है. दौड़ में कुछ आईएफएस अफ़सरों का नाम भी सुनाई देता रहा है. लेकिन इस बार काम को ही तवज्जो देने की कोशिश है. लिहाजा दौड़ में मौजूद अफसरों की उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है. वन मुख्यालय में भी महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव होने जा रहा है. वनाग्नि से लेकर कैम्पा तक में नए चेहरों पर विचार किया गया है. बताया जा रहा है कि कैम्पा में हुए कार्यों को लेकर उच्चस्थ अफ़सर और मंत्री खुश नहीं हैं. उधर बजट लैप्स होना भी इसकी बड़ी वजह है।
विभाग के अलावा वन पंचायत से लेकर जायका में भी बदलाव की सुगबुगाहट है. पिछली बार वन विकास निगम में एमडी पद से चूकने वाले सीनियर अफ़सर को वन पंचायत में जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है. इसी तरह जायका में भी सीनियर अफ़सर के रिटायरमेंट को देखते हुए कुछ नामों पर विचार किया गया था, जिसमें बदलाव होने की सुगबुगाहट है।