उच्च हिमालई क्षेत्र में विराजमान चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ 18 मई को खुलेंगे आज बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भगवान गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में की गई घोषणा।
उच्च हिमालई क्षेत्र में विराजमान चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ 18 मई को खुलेंगे आज बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भगवान गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में की गई घोषणा।
चमोली/ उत्तराखंड के पंच केदारों में चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट आगामी 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ कपाट खुलने की तिथि की औपचारिक घोषणा की गई।
शुक्रवार 23 जनवरी को वसंत पंचमी के दिन गोपीनाथ मंदिर में ब्राह्मणों ने हक हकूकधारियों की उपस्थिति में पंचांग गणना के आधार पर तिथि की घोषित की। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के मंदिर में भगवान शिव के एकान्न रूप की पूजा होती है। यहां भगवान अपने एकानन स्वरूप में विराजमान रहते हैं इसी कारण उन्हें एकानन भोलेनाथ के नाम से भी जाना जाता है।
भगवान रुद्रनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 18 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई करके यात्रा करनी होती है। रुद्रनाथ धाम तक पहुंचने के लिए गोपेश्वर के मंडल-सगर गांव मार्ग के अलावा जोशीमठ के उर्गम और डुमुक से भी पैदल मार्ग उपलब्ध है। कपाट खुलने से पूर्व 15 और 16 मई को भगवान रुद्रनाथ के उत्सव विग्रह के दर्शन गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर परिसर में श्रद्धालु कर पाएंगे। 17 मई को भगवान रुद्रनाथ जी की डोली धाम के लिए प्रस्थान करेगी और 18 मई को निर्धारित शुभ मुहूर्त पर ग्रीष्मकाल के लिए कपाट खोले जाएंगे।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शीतकाल में लगभग छह माह के लिए भगवान रुद्रनाथ के कपाट बंद रहते हैं और इस अवधि में भगवान की नित्य पूजा-अर्चना गोपीनाथ मंदिर में संपन्न होती है। जो श्रद्धालु कठिन यात्रा के कारण रुद्रनाथ धाम नहीं पहुंच पाते वे गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। रुद्रनाथ मंदिर उत्तर भारत का एकमात्र शिव मंदिर है जहां भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं।