देहरादून/ सीमित संसाधनों वाले
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा 94 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक इसमें किसी बड़ी कमी की संभावना भी नहीं दिख रही है। अनुमान है कि मार्च 2027 तक यह कर्ज एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है।
राज्य गठन के वक्त उत्तराखंड पर महज करीब 9 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था परन्तु वक्त के साथ यह तेजी से बढ़ता गया। खासकर वर्ष 2010-11 से 2019-20 के बीच कर्ज में तेज उछाल देखने को मिला। हालांकि 2020-21 के बाद वृद्धि की रफ्तार में कुछ कमी जरूर आई है फिर भी कुल कर्ज का आंकड़ा लगातार ऊपर ही जा रहा है। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य पर लगभग 83 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था जो अब बढ़कर लगभग 94 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यानी सिर्फ एक वर्ष में ही कर्ज में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर के मुताबिक वर्ष 2020-21 के बाद कर्ज की वृद्धि दर में लगातार कमी आ रही है। वहीं कर्ज का ग्राफ जीएसडीपी के 30 प्रतिशत की सीमा से भी काफी कम 25 प्रतिशत पर सिमटा है।
उनका कहना है कि वर्तमान में राज्य पर कर्ज की स्थिति एफआरबीएम एक्ट की निर्धारित सीमा के अंदर है और आगे भी इसके इसी दायरे में रहने का अनुमान है। फिर भी वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य की आय के स्रोतों में तेजी से वृद्धि नहीं हुई तो भविष्य में कर्ज की अदायगी का दबाव और बढ़ सकता है जिसके लिए सरकार को राजस्व बढ़ाने और कर्ज चुकाने की रफ्तार तेज करनी होगी। वित्तीय वर्ष कुल कर्ज (₹ करोड़) बढ़ोतरी (₹ करोड़) वृद्धि (%)