नैनीताल जिले के धारी और ओखलकाडां विकास खंड के 28 शिक्षकों की नौकरी पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार दो राज्यों के स्थाई प्रमाण पत्र का है मामला।

न्यूज 13 प्रतिनिधि नैनीताल

नैनीताल/ जिले के धारी और ओखलकांडा विकास खंड के 28 शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है दो राज्यों के स्थायी निवास पर नौकरी पाने का है आरोप जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक ने जारी किया नोटिस।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) नैनीताल ए.बी. चंद ने जिले में एक-डेढ़ साल पूर्व नियुक्त 28 प्राथमिक शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करके हड़कंप मचा दिया है। इन शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड-दोनों राज्यों के स्थायी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर प्रशिक्षण व नियुक्ति लेने का गंभीर आरोप है। नोटिस के बाद इन शिक्षकों की नौकरी पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

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जिन 28 शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है उनमें 25 शिक्षक ओखलकांडा और 3 शिक्षक धारी विकास खंड में तैनात हैं। ये नियुक्तिया अगस्त 2024 से अप्रैल 2025 के बीच की गई थीं। दो राज्यों का स्थायी निवासी कैसे? जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश से डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थी का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। प्रवेश के समय सक्षम अधिकारी द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होता है।वहीं उत्तराखंड में सहायक अध्यापक प्राथमिक पट पर नियक्ति के लिए उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।

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नोटिस के मुताबिक इन शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश के स्थायी निवास के आधार पर प्रशिक्षण प्राप्त किया जबकि उत्तराखंड के स्थायी निवास के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। ऐसे में सवाल उठता है कि एक व्यक्ति एक ही समय में दो राज्यों का स्थायी निवासी कैसे हो सकता है?

आईपीसी की धारा 420 तक पहुंच सकता है मामला जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे तथ्य छुपाकर प्रशिक्षण या नियुक्ति प्राप्त करने का मामला बताया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि एक राज्य का स्थायी निवास सही है तो दूसरे राज्य का प्रमाण पत्र अवैध होगा।

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यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है।

15 दिन का दिया अल्टीमेटम

डीईओ ने सभी 28 शिक्षकों को 15 दिन के भीतर स्वयं उपस्थित होकर तथ्यों सहित अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 (संशोधित 2010) के तहत सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और मामला अब जिले का सबसे बड़ा शिक्षा विवाद बनता नजर आ रहा है।

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