चौखुटिया/ तल्ला गेवाड के दर्जन भर ग्राम पंचायतों मैं लावारिस, जंगली जानवरों से हो रहे खेती नुकसान को लेकर विभिन्न ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन कर तहसीलदार विवेक राजौरी के माध्यम से उप जिलाधिकारी सहित प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा, चेतावनी दी सप्ताह भर मैं लावारिस जानवरों से निजात नहीं मिलने पर काश्तकार तहसील प्रांगण में जानवरों को बांधकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
लगातार लावारिस, आवारा जानवरों से खेती को पहुंच रहे नुकसान से गुस्साए ग्राम पंचायत जेठुआ, भगोती, पटलगांव, चिनौनी के ग्रामीणों ने ब्लाक प्रमुख किरण बिष्ट के नेतृत्व में तहसील प्रांगण मैं पहुंचकर शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया, चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर इन लावारिस ,जंगली जानवरों को अन्यत्र गौशाला भेजने की व्यवस्था नहीं की गई मजबूरन ग्रामीण लावारिस जानवरों को लेकर तहसील मुख्यालय में बांद कर आंदोलन करेंगे। रहे मौजूद
ब्लाक प्रमुख किरण बिष्ट, ग्राम प्रधान जेठुआ पुष्पा जोशी, ग्राम प्रधान पटलगांव शंकर सिंह ,ग्राम प्रधान चिनौनी आनंद सिंह, हीरा बिष्ट ,कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष नंदन सिंह, गोपाल अधिकारी ,भावना रावत, कमला देवी, भगवत सिंह, गणेश दत्त, दान सिंह, मोहनी देवी, हेमा रावत ,खष्टी देवी, गीता जोशी, विपिन जोशी ,हर्षित खुल्वै, जानकी देवी ,चंपा देवी, लता देवी ,कुंवर सिंह, गोपाल बिष्ट आदि रहे।
फोटो- चौखुटिया तहसील मुख्यालय में तल्ला गेवाड के विभिन्न ग्राम पंचायतों के ग्रामीण लावारिस जानवरों को लेकर प्रदर्शन करते व तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए।
कृषि योग्य भूमि चौपट, पलायन को ग्रामीण मजबूर
प्रदेश सरकार कृषि को आगे बढ़ाने के लिए भले ही लाखों दावे करें लेकिन पहाड़ी गांव की हालत ऐसी हो गई है कि ग्रामीणों का खेती से मोहभंग हो गया है तथा ग्रामीणों के आगे रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है जिससे पलायन की गति बढ़ती जा रही है यहां की खेती कैसे बचाई जाए सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है परिणाम स्वरुप पहाड़ों में गांव के गांव खाली हो गए हैं कभी सिंचाई विभाग की लापरवाही व मौसम की मार तो ग्रामीण जैसे तैसे झेल लेते हैं लेकिन लावारिस पशुओं ने तो काश्तकारों की कमर तोड़ दी है राज्य गठन के साथ कृषि से जुड़ी महिलाओं को लगा कि अब नई तकनीक के साथ खेती कर अधिक उपज मिलेगी लेकिन निराशा ही हाथ लगी कृषि के क्षेत्र में अग्रणी इस गेवाड़ घाटी में 20फीसदी ग्रामीण खेती से अपना भरण पोषण नहीं कर पा रहे हैं
इन जानवरों ने खेती की निर्भरता ही नहीं बल्कि घरों में रहना भी मुश्किल कर दिया है कृषि के क्षेत्र में अलग पहचान रखने वाली गेवाड़ घाटी का अस्तित्व धीरे धीरे ख़त्म हो रहा है हालत यह हो गई है कि कृषि भूमि बंजर पड़ी है वर्तमान में बंदर सूअर व लावारिस जानवरों ने धान पौध सहित भट्ट ,सोयाबीन दलहनी व साग सब्जी की फसल भी चौपट कर दी है , अब ग्रामीण लगातार खेती छोड़ रहे हैं।
बोले जनप्रतिनिधि
1- किरन बिष्ट ब्लाक प्रमुख- सरकार को चाहिए कि गांव में गठित महिला समूह को मजबूत कर आर्थिक सहायता के माध्यम से सामूहिक रुप से लावारिस पशुओं को चिन्हित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए जिससे खेती तो बचेगी महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
कहां शीघ्र सभी ग्राम प्रधान ,क्षेत्र पंचायत सदस्यों को लेकर इसके लिए व्यापक मुहिम चलाई जाएगी।
2- पुष्पा जोशी ग्राम प्रधान जेठुआ- पहाड़ की अर्थव्यवस्था कृषि से जुड़ी है कृषि व्यवस्था ठीक होने से पलायन पर भी कुछ हद तक रोक लगाई जा सकती है लावारिस व जंगली जानवरों से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार ग्रामीण काश्तकारों से वार्ता कर ठोस नीति बनाएं जिससे खेती को बचाया जा सके।