तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मार्ग पर गंभीर अव्यवस्थाओं ने प्रशासन के सुगम यात्रा के दावों की खोली पोल, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाव की भी साफ दिखाई देती है लापरवाही

न्यूज 13 प्रतिनिधि रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग/ जिले में स्थित प्रसिद्ध तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के पैदल यात्रा का मार्ग जो चोपता से शुरू होता है इस वक्त भारी अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। देश और विदेश से दर्शनों के लिए आ रहे श्रद्धालुओं को जगह-जगह फैले कूड़े और गंदगी के बीच से होकर अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ रही है जिससे प्रशासन द्वारा किए गए सुगम यात्रा के दावे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं। इस मार्ग पर केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की लापरवाही भी साफ और स्पष्ट दिखाई देती है।

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यहां के प्रसिद्ध बुग्यालों में लगातार बढ़ती भीड़ और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों ने यहां की प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद से यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है परन्तु रास्ते में शौचालय, स्वच्छ पेयजल और बैठने के लिए प्रतिक्षालय जैसी मूलभूत सुविधाए नदारद हैं।

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शौचालयों की कमी के चलते कई श्रद्धालु खुले में शौच करने को मजबूर हो रहे हैं जिसके चलते पूरा यात्रा मार्ग दूषित हो रहा है और गंदगी फैल रही है। इसके साथ ही पेयजल आपूर्ति ठप है और यात्रियों के आराम के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इससे न केवल यात्री बल्कि यहां के स्थानीय व्यापारी और घोड़ा-खच्चर संचालक भी परेशान हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी रास्ते पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि यात्रा के कई संवेदनशील जगहों पर बनी रेलिंग टूटी हुई है।

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जिससे यात्रियों के फिसलकर गिरने की हमेशा आंशका बनी रहती है।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यही हालात रहे तो तुंगनाथ की यह पवित्र यात्रा भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए कठिनाई और मुश्किलों भरी बन जाएगी। उत्तराखंड का मुख्य व्यवसाय पर्यटन और तीर्थाटन है। यदि व्यवस्थाएं दुरस्त होंगी तो यात्री निश्चित रूप से अपने साथ अच्छी और सुखद यादों के साथ वापस जाएंगे जिससे राज्य की छवि सुधरेगी। अब स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मार्ग की व्यवस्थाएं सुधारने और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं देने की मांग की है।

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