पौड़ी/ जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का दुरुपयोग कर अधिशासी अभियन्ता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोक निर्माण विभाग श्रीनगर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के विरोध में रविवार को उत्तराखण्ड इंजीनियर्स फेडरेशन की प्रांतीय कार्यकारिणी की आपात ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, पेयजल विभाग, पावर कॉरपोरेशन, लघु सिंचाई विभाग,
ग्रामीण निर्माण विभाग, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन एवं जल विद्युत निगम लिमिटेड के अभियंता संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में कहा गया कि 11 सितंबर को भारी वर्षा के चलते श्रीनगर-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग 40-45 मीटर हिस्सा बह गया था। इस विकट परिस्थिति में अधिशासी अभियन्ता एवं विभागीय कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार पत्थरों की बारिश के बीच सड़क खोलने का कार्य किया। तकनीकी परामर्श लेकर डीपीआर भी भारत सरकार को भेजी जा चुकी है।
इसके बावजूद जिलाधिकारी पौड़ी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराना हठधर्मिता एवं तानाशाही का प्रतीक है। फेडरेशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस कार्रवाई के विरोध में प्रदेश के सभी अभियंता 15 सितंबर को जिलाधिकारियों के माध्यम से और 16 सितंबर को विधायकों व सांसदों के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपेंगे तथा काली पट्टी पहनकर कार्य करेंगे।
संगठन ने सरकार से मांग की
1- अधिशासी अभियन्ता पर दर्ज प्राथमिकी तत्काल निरस्त की जाए।
2- जिलाधिकारी पौड़ी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हो।
3- यदि उनके अविवेकपूर्ण आदेशों से आपदा कार्य प्रभावित होते हैं तो आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो।
4- भविष्य में जिलाधिकारी पद पर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति हो जो धरातल की वास्तविकताओं से अवगत हों और आपदा की स्थिति में बेहतर समन्वय बना पाए।