अल्मोड़ा/ जिले में इस बार फायर सीजन शुरू होने से पहले ही जंगल धधकने लगे हैं। जनवरी महीने में ही जंगलों का धधकना न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी है बल्कि वन विभाग और फायर सर्विस के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
17 जनवरी को दो क्षेत्रों में भड़की वनाग्नि
17 जनवरी की शाम को सोमेश्वर और चितई क्षेत्र के पास जंगल में आग लगने की सूचना फायर स्टेशन अल्मोड़ा को प्राप्त हुई।
सूचना मिलते ही फायर सर्विस अल्मोड़ा की दो अलग-अलग टीमें फौरन घटनास्थल के लिए रवाना हुईं ।
सोमेश्वर में तहसील परिसर की ओर बढ़ती जा रही थी आग
सोमेश्वर क्षेत्र में जंगल की आग तेजी से तहसील परिसर की ओर बढ़ रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फायर टीम ने एमएफई से पंपिंग करके हौज रील की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। वक्त रहते कार्रवाई न होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था ।
चितई- दुर्गम जंगल में भड़की आग
वहीं चितई क्षेत्र में मुख्य मार्ग से दूर जंगल में फैली आग को वन विभाग की टीम के साथ समन्वय स्थापित कर पीट -पीटकर पूरी तरह बुझाया गया।
दुर्गम क्षेत्र होने के कारण आग बुझाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी ।
पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी आग की बड़ी वजह
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि लंबे वक्त से बारिश न होने के कारण जंगलों में नमी खत्म हो गई है जिससे सूखी पत्तियां और घास आसानी से आग पकड़ रही हैं।
यही कारण है कि फायर सीजन से पहले ही वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही हैं।
वन विभाग के सामने बढ़ी चुनौती
लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वन विभाग को प्रभावी रणनीति अपनानी होगी। संसाधनों में वृद्धि, सतर्कता, जनजागरूकता और समय से पहले फायर सीजन की तैयारी अब बेहद जरूरी हो गई है ताकि पर्यावरण, वन्यजीव और मानव बस्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।