बड़ी खबर>>> 110 वन आरक्षी व 47 वन दरोगाओं सहित 180 फील्ड कर्मचारियों के हुए तबादले हाल ही में भर्ती हुए वन क्षेत्राधिकारी को भी दी गई अलग-अलग वन प्रभागों में तैनाती।
बड़ी खबर>>> 110 वन आरक्षी व 47 वन दरोगाओं सहित 180 फील्ड कर्मचारियों के हुए तबादले हाल ही में भर्ती हुए वन क्षेत्राधिकारी को भी दी गई अलग-अलग वन प्रभागों में तैनाती।
देहरादून/ उत्तराखंड वन विभाग ने लंबे वक्त से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे फील्ड कर्मचारियों को राहत देते हुए बड़े पैमाने पर स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। विभाग ने पहली बार व्यापक स्तर पर मानव संसाधन प्रबंधन का अध्ययन कर वनकर्मियों की पसंद और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तबादला प्रक्रिया को अंजाम दिया है।
वन मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के तहत 110 वन आरक्षियों और 47 वन दरोगाओं सहित लगभग 180 फील्ड कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं।
इसके अलावा उपवन क्षेत्राधिकारी स्तर पर भी सीमित संख्या में स्थानांतरण किए गए हैं। हाल ही में भर्ती हुए वन क्षेत्राधिकारी को अलग-अलग वन प्रभागों में तैनाती देने के आदेश भी जारी किए गए हैं। वन विभाग में लंबे वक्त से यह मांग उठती रही है कि कर्मचारियों को उनके गृह जनपद या उसके आसपास तैनाती दी जाए। हालांकि सीमित पदों और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सभी कर्मचारियों की इच्छा पूरी करना संभव नहीं हो पा रहा था। इसके बावजूद इस बार विभाग ने विस्तृत होमवर्क करते हुए अधिकतम कर्मचारियों को उनकी प्राथमिकता के मुताबिक तैनाती देने का प्रयास किया है।
सूत्रों के मुताबिक कई वनकर्मी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत थे जबकि कुछ कर्मचारी लगातार अनुरोध करने के बावजूद अपने गृह क्षेत्र के नजदीक तैनाती नहीं पा सके थे। ऐसे कर्मचारियों की समस्याओं और मनोबल को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। वन मुख्यालय की सूची के अलावा मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल कार्यालय की ओर से भी गढ़वाल क्षेत्र के कर्मचारियों के स्थानांतरण संबंधी अलग आदेश जारी किए गए हैं। इससे तबादला प्रक्रिया का दायरा और व्यापक हो गया है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कर्मचारियों को परिवार और गृह क्षेत्र के निकट तैनाती मिलने से उनकी कार्यक्षमता और मनोबल में सकारात्मक सुधार होगा।
साथ ही वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े कार्यों में भी बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। वन विभाग की इस पहल को कर्मचारियों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे वक्त से तबादले की आस लगाए बैठे अनेक वनकर्मियों को इस सूची से राहत मिलने की उम्मीद है जबकि भविष्य में भी इसी तरह पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी तबादला नीति अपनाने की मांग तेज हो सकती है।