नैनीताल/ बेतालघाट शाखा में उप डाकपाल के पद पर कार्यरत रहे भुवन राम आर्या को न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज जूनियर डिविजन उर्वशी रावत की अदालत ने 4,54,500 रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में दोषी पाते हुए तीन साल कठोर कारावास और आठ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में आरोपित को एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए जिनसे आरोप सिद्ध हुआ। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पाया गया कि भुवन राम निवासी धनियाकोट, गरमपानी तहसील कोश्या कुटौली वर्तमान कैंची धाम भवाली, जिला नैनीताल, 15 जून 2017 से 4 अप्रैल 2019 तक बेतालघाट में उप डाकपाल पद पर कार्यरत थे।
इस बीच उन्होंने अलग-अलग खातों से फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से धनराशि निकालकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। अदालत ने इस गंभीर आर्थिक अपराध को लोक सेवक की जिम्मेदारी के विपरीत ठहराते हुए सजा सुनाई।
किन खातों से निकाली गई धनराशि
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि आरोपित ने अलग-अलग खातों से क्रमशः 1,48,000, 81,000, 54,000, 50,000, 36,000, 35,000 और 16,500 रुपये की निकासी की। इस तरह कुल 4,54,500 रुपये की गबन की गई राशि सामने आई। आरोप था कि आरोपित ने इन लेन-देन के लिए कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग किया और उन्हें असल के रूप में प्रस्तुत किया।
विभागीय जांच और अभियोग दर्ज
खाताधारकों ने अपने खातों में जमा धनराशि कम पाए जाने पर विभागीय कार्यालय में शिकायत की। जांच के दौरान अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
इसके बाद पांच जून 2019 को आरोपित के विरुद्ध भवाली कोतवाली में संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज किया गया।आरोपित पर भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं में मुकदमा चला जिनमें कूटरचना और लोक सेवक द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध शामिल हैं।
गवाहों की भूमिका
इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। इनमें खाताधारकों के बयान विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट तथा जांच से जुड़े दस्तावेज शामिल थे। इन साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि आरोपित ने योजनाबद्ध ढंग से खातों से धनराशि निकालकर व्यक्तिगत लाभ उठाया।
न्यायालय की टिप्पणी और महत्व
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि लोक सेवक का पद समाज और शासन के बीच विश्वास की नींव होता है। ऐसे में यदि कोई लोक सेवक अपनी जिम्मेदारी से भटककर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करता है तो उसे कठोर दंड मिलना आवश्यक है।
इस मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपित ने आमजन की गाढ़ी कमाई को धोखाधड़ी से निकाला जो क्षम्य अपराध नहीं हो सकता।
लोक सेवकों के लिए नजीर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में लोक सेवकों के लिए नजीर का काम करेगा। अदालत का यह फैसला संदेश देता है कि किसी भी स्तर पर आर्थिक अनियमितता और कर्तव्य की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही विभागीय सतर्कता और वित्तीय पारदर्शिता की महत्ता पर भी यह घटना प्रकाश डालती है।
उत्तराखंड में हाल के वर्षों में कई बार सरकारी धन के दुरुपयोग और विभागीय लापरवाही के मामले सामने आते रहे हैं। बेतालघाट उप डाकपाल प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वित्तीय लेन-देन में अधिक निगरानी और तकनीकी सुधार क्यों आवश्यक हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते आधुनिक तंत्र और पारदर्शी निगरानी प्रणाली लागू की जाए तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।