रानीखेत विधानसभा से बीजेपी के 12 उम्मीदवारों ने ठोंकी ताल वर्तमान विधायक पर महिला उम्मीदवार पड़ सकती है भारी संगठन महिला उम्मीदवार विमला रावत को उतार सकता है मैदान में।

न्यूज 13 प्रतिनिधि अल्मोड़ा

रानीखेत/ 2027के विधानसभा चुनावों को लेकर रानीखेत भाजपा में टिकट की दावेदारी ने पार्टी के अंदर सियासी हलचल बढ़ा दी है। चिलियानौला में हाल ही में आयोजित भाजपा जिला रानीखेत की बैठक में टिकट के लिए एक-दो नहीं बल्कि 12 नेताओं ने अपनी दावेदारी ठोक डाली। संगठन महामंत्री फणीन्द्रनाथ शर्मा की मौजूदगी में देर शाम तक चली बैठक में आगामी चुनाव की तैयारियों के साथ ही कार्यकर्ताओं की राय और संगठन की चुनावी संभावनाओं को लेकर चर्चा की गई।

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बैठक में दावेदारी ठोंकने वालों में वर्तमान विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, दर्जा राज्यमंत्री कैलाश पंत, पूर्व जिलाध्यक्ष लीला बिष्ट, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीप पाण्डे, महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री विमला रावत, जिला पंचायत सदस्य शांति उप्रेती, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीप भगत, छावनी परिषद के नामित सदस्य मोहन नेगी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गिरीश (गुड्डू) भगत, चिलियानौला नगर पालिका के मनोनीत सदस्य रोहित शर्मा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख धन सिंह रावत के साथ ही ताड़ीखेत निवासी प्रमोद रावत शामिल हैं।

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इससे पहले रानीखेत सीट पर भाजपा से टिकट के लिए लगभग पांच नाम ही प्रमुखता से चर्चा में थे परन्तु बैठक में 12 दावेदारों के सामने आने से मुकाबला रोचक हो गया है। दावेदारों की लंबी कतार ने पार्टी के अंदर टिकट को लेकर चल रही खींचतान को भी सड़कें सामने जाहिर कर दिया है। वर्तमान विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल के सामने जहां पांच साल के कार्यकाल के बाद दोबारा टिकट पाने की चुनौती है वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय दावेदारी ने उनकी राह को मुश्किल बना दिया है। दूसरी ओर भाजपा के सामने टिकट वितरण के बाद सभी दावेदारों को एकजुट रखने की चुनौती भी कठिन होने वाली है। पार्टी हाईकमान को 12 दावेदारों में से किसी एक के नाम पर मुहर लगानी है।

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ऐसे में टिकट से वंचित रह जाने वाले नेताओं और उनके समर्थकों को मनाकर चुनावी मैदान में एकजुट रखना संगठन के लिए कठिन परीक्षा साबित होने वाली है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि दावेदारों के बीच आपसी सहमति नहीं बनी तो चुनावों में भीतरघात की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में रानीखेत सीट पर भाजपा की चुनावी रणनीति और टिकट का फैसला दोनों ही महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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