प्रीतम गणेश व हरक की त्रिवेणी ने बढ़ाया उत्तराखंड का सियासी पारा, टूटी फूटी धामी की कैबिनेट को कांग्रेस के नए फाइटर्स के हमले नाकाम करने के भगीरथ प्रयास करने होंगे।

न्यूज़ 13 प्रतिनिधि देहरादून

देहरादून/ काफी सोच विचार के बाद कांग्रेस ने भाजपा के आसमान पर अपने फाइटर उतार दिए हैं बीते तीन साल से आधी अधूरी धामी सरकार पर कांग्रेस के नए लेकिन अनुभवी फाइटर बमबारी के लिए पूरी तरह तैयार रहे। अब टीम कांग्रेस की तैयार हुई और इसी के साथ भाजपा की चुनौती कई गुना बढ़ गयी। मंगलवार की देर रात कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद भाजपा की छांछ छोल चुके गणेश गोदियाल को एक बार फिर संगठन की बागडोर सौंपी है। मौजूदा अध्यक्ष करण माहरा को विदाई देते हुए गोदियाल को आगे लाकर कांग्रेस ने अपने इरादे जता दिए।

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हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद इसी आलाकमान ने गोदियाल को संगठन अध्यक्ष पद से हटा दिया था। परन्तु 2024 के लोकसभा चुनाव में गोदियाल ने जबर्दस्त ढंग से चुनाव लड़ते हुए भाजपा को अतिरिक्त मेहनत के लिए मजबूर कर दिया था। गोदियाल के कड़े चुनावी सघर्ष को कांग्रेस आलाकमान ने भी सराहा था। बहरहाल 11 नवंबर को कांग्रेस ने गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह रावत के साथ ही हरक सिंह रावत को चुनाव की बागडोर देकर भाजपा के रणनीतिकारों को भी नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया। बीते कुछ समय से राजनीतिक जिम्मेदारी से मुक्त चल रहे हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश की है।

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2022 में चुनाव नहीं लड़ने वाले हरक सिंह इन दिनों सीबीआई व ईडी का सामना भी कर रहे हैं। बावजूद इसके हरक सिंह भाजपा पर कड़े प्रहार करने से नहीं चूक रहे हैं। चुनावी माहौल बनाने में हरक सिंह की विशिष्ट शैली पार्टी के बहुत काम आएगी। हालांकि अब केंद्रीय जांच एजेंसी हरक सिंह पर ज्यादा कड़ा शिकंजा कस सकती है।कांग्रेस आलाकमान ने चकराता से पार्टी विधायक प्रीतम सिंह को 2027 के लिए चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। प्रीतम सिंह का विधानसभा के अंदर और बाहर आक्रामक प्रदर्शन रहता है। बीते दिनों प्रीतम सिंह ने देहरादून की जिला पंचायत अध्यक्ष सीट जीतकर भाजपा को करारी हार दी थी। कांग्रेस ने गढ़वाल से गोदियाल, हरक व प्रीतम का चयन करके चुनावी जंग का ऐलान कर दिया है। साथ ही संगठन के जिलों में भी अध्यक्षों की नियुक्ति कर मुकम्मल टीम मैदान में उतार दी है।

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जमीन पर भाजपा से भिड़ने की जिम्मेदारी गढ़वाल के कंधों पर है तो विधानसभा में मोर्चा संभालने का अहम कार्य नेता विपक्ष यशपाल आर्या और उपनेता भुवन कापड़ी सम्भाल रहे हैं। कांग्रेस की नई टीम के गठन में पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीते दिनों खेले गए ब्राह्मण कार्ड की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। जिलाध्यक्षों में भी इसकी झलक दिख रही है। हालांकि करण माहरा के करीबी हरक सिंह को चुनाव प्रबन्धन की जिम्मेदारी देते हुए पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की भी कोशिश की गई है। अब हरक की नई भूमिका को हरीश रावत कैम्प कैसे लेता है यह देखना भी दिलचस्प होगा।

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कांग्रेस हाईकमान ने सक्रिय हरदा को सीधे तौर पर कोई चुनावी जिम्मेदारी तो नहीं दी है लेकिन नई टीम में उनके पसन्दीदा गोदियाल और प्रीतम सिंह को भारी भरकम जिम्मेदारी अवश्य दी। कांग्रेस की नई टीम का ऐलान होते ही पार्टी के अंदर करंट दौड़ता दिखाई दे रहा है। उधर टूटी फूटी कैबिनेट लिए मुख्यमंत्री धामी और भाजपा आलाकमान को कांग्रेस के इन नए फाइटर्स के हमलों को नाकाम करने के लिए भगीरथ प्रयास करने होंगे । चुनावी जंग रोचक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले वक्त में राजनीतिक उठापटक का दौर चलने की पूरी उम्मीद है।

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