नैनीताल/ नैनीताल में महिला पर्यटक की निजता भंग करने के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए होटल कर्मचारी को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि रंजन की कोर्ट ने अभियुक्त राहुल कुमार को आईपीसी की धारा 354 (ग) के तहत दोषी करार देते हुए पांच हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। जुर्माना जमा न करने पर उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
बाथरूम की खिड़की से बना रहा था वीडियो
सहायक अभियोजन अधिकारी शिवांजना शर्मा के मुताबिक महिला पर्यटक ने मल्लीताल कोतवाली में दर्ज तहरीर में बताया था कि वह अपने पति के साथ घूमने के लिए नैनीताल आई थी।
दंपती ने 13 से 15 अगस्त 2022 तक होटल अरोमा में कमरा नंबर 310 बुक कराया था। 15 अगस्त की सुबह महिला बाथरूम में नहा रही थी। नहाने के बाद जैसे ही कपड़े पहनने लगी तभी उसने देखा कि बाथरूम की खिड़की से कोई मोबाइल फोन से उसकी रिकॉर्डिंग कर रहा है।
महिला के शोर मचाने पर उसका पति मौके पर पहुंचा और दोनों ने होटल मैनेजर संदीप को सूचना देने के साथ पुलिस को भी बुला लिया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने होटल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में होटल कर्मचारी राहुल सुबह करीब 9:10 बजे कॉमन कॉरिडोर से निकलते दिखाई दिया। फुटेज में वह स्टाफ गैलरी की ओर जाता और कुछ देर बाद तेजी से लौटता नजर आया।
पुलिस ने जब उसका मोबाइल फोन चेक किया तो उसके पास कोई रिकॉर्डिंग नहीं मिली परन्तु अलग कमरे में पूछताछ के दौरान राहुल ने मोबाइल से वीडियो बनाने की बात स्वीकार कर ली। तहरीर के आधार पर थाना मल्लीताल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 354 (ग) आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपी राहुल कुमार निवासी ग्राम रतखान, थाना लमगड़ा जिला अल्मोड़ा के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने महिला उसके पति विवेचक उपनिरीक्षक पूजा मेहरा सहित नौ गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए।
हालांकि अभियुक्त ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर राहुल को दोषी करार दिया। सजा सुनाए जाने से पहले अभियुक्त ने अदालत से नरमी बरतने की मांग करते हुए खुद को घर का इकलौता कमाऊ सदस्य बताया और कहा कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसके बावजूद अदालत ने मामले को महिला की निजता और सम्मान से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए कठोर सजा सुनाई।