देहरादून/ भूमाफिया और अधिकारियों की साथ-गांठ का एक नया मामला सामने आया है जिसमें बगीचे की भूमि पर आवासीय भूमि बनाकर रजिस्ट्री करा दी गई। नया मामला देहरादून के नकरौंदा में राणा फार्म के समीप का सामने आया है। जिसमें खसरा नंबर 682क, ख, ग 683ख, 684ख,685 जो की तकरीबन 46 बीघा जमीन है जिसमें हरे पेड़ों पर बिना परमिशन लिए आरियां चला दी गई जिसमें लीची, शीशम, आम, शागोन आदि फलदार व इमारती हरे पेड़ मौजूद थे।
यह मामला तब खुला जब एक व्यक्ति द्वारा इसकी शिकायत प्रभागीय वन अधिकारी देहरादून को की गई विभाग द्वारा स्थलीय निरीक्षण करने के उपरांत पता चला कि इस जमीन पर पेड़ो की लोपिंग के लिए पर परमिशन ली गई थी और इसकी आड़ में तकरीबन 115 हरे पेड़ों पर आरी चला दी गई।हालांकि वन विभाग ने शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया लेकिन बगीचे की 46 बीघा भूमि पर प्लाटिंग लगातार जारी रही जिसमें ना ही एमडीडीए से कोई परमिशन ली गई और ना ही एमडीडीए द्वारा इस अवैध प्लाटिंग का संज्ञान लिया गया।
बताया जा रहा है कि इस भूमि पर मनजीत जौहर, सक्षम हवेलियां, रामेश्वर हवेलियां, आदी के द्वारा प्लाटिंग की जा रही है। प्लाटिंग को आवासीय भूखंड के नाम पर बेच दी गई अब प्रॉपर्टी खरीद चुके लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं उनका कहना है की उन्हें भूमि आवासीय बता कर बेच दी गई लैंड यूज बगीचा होने की सूचना प्रॉपर्टी डीलर द्वारा छुपाई गई। एमडीडीए द्वारा कुछ समय पूर्व यहां पर दो बोर्ड भी लगा दिए गए थे। जिसमें एमडीडीए द्वारा लिखा गया था कि इस भूमि पर क्रय विक्रय बंद है और यह मामला एमडीडीए में अभी विचाराधीन है।
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परन्तु उसके बावजूद भी धड़ल्ले से इन खसरा खतौनियों पर रजिस्ट्री हुई और धड़ल्ले से बिना एमडीडीए के मानचित्र पास कराए बिना ही आवासीय भवन बना दिए गए। जिसमें एमडीडीए के अधिकारी और भूमाफियाओं की मिली भगत प्रतीत होती है। इस प्रकार के मामले देहरादून प्रशासन की कार्यशैली पर भी एक प्रश्न भी खड़ा करता है अब देखने वाली बात यह यहां क्या कार्यवाही होगी।