द्वाराहाट से लीसा तस्करी का गज़ब खेल टूरिस्ट बस लीसा भरकर अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी सहित यूपी के कई जिले पार करके पहुंच गई पुलभट्टा न पुलिस को लगी भनक न वन विभाग को।
द्वाराहाट से लीसा तस्करी का गज़ब खेल टूरिस्ट बस लीसा भरकर अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी सहित यूपी के कई जिले पार करके पहुंच गई पुलभट्टा न पुलिस को लगी भनक न वन विभाग को।
उधम सिंह नगर/ त्योहारी सीजन में संदिग्ध वाहनों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के बीच बाजपुर पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है। सुल्तानपुर पट्टी चौकी क्षेत्र में पुलिस ने एक टूरिस्ट बस की तलाशी लेकर उसमें छिपाकर ले जाया जा रहा 348 कनस्तर अवैध लीसा बरामद किया। बरामद लीसे की अनुमानित कीमत लगभग 10.5 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने बस चालक समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक एसएसपी के निर्देश पर जिले में इन दिनों संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की सघन चेकिंग की जा रही है। इसी क्रम में बुधवार को सुल्तानपुर पट्टी चौकी पुलिस छोई मोड़ पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी बीच एक टूरिस्ट बस पुलिस को संदिग्ध प्रतीत हुई। पुलिस ने बस को रोककर उसकी तलाशी शुरू की तो अंदर का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए।
सीटें हटाकर तैयार किया था लीसे की तस्करी का ठिकाना।
तलाशी के दौरान बस की अधिकांश सवारी सीटें उखड़ी हुई मिलीं। बस के फर्श पर काली पन्नी बिछाई गई थी। पुलिस ने जब पन्नी हटाई तो उसके नीचे बड़ी संख्या में लीसे के कनस्तर छिपाकर रखे थे।
इसके अलावा बस की डिग्गी में भी कनस्तर लदे हुए थे। पुलिस ने सभी कनस्तरों को बाहर निकलवाकर उनकी गिनती कराई तो कुल 348 कनस्तर लीसा बरामद हुआ। प्रारंभिक आकलन में इसकी कीमत लगभग 10.5 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस का कहना है कि बस में यात्रियों के बैठने वाली सीटें हटाकर लीसे के कनस्तर रखने के लिए बाकायदा जगह तैयार की गई थी। इसके बाद पूरे माल को काली पन्नी से ढक दिया गया था ताकि सामान्य चेकिंग के दौरान यह आसानी से नजर न आए।द्वाराहाट से पुलभट्ठा तक पहुंचाना था माल पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि बरामद लीसा मनोज रावत का बताया गया है।
आरोपियों के अनुसार लीसा को द्वाराहाट अल्मोड़ा से बस में लादा गया था और इसे पुलभट्ठा टोल प्लाजा के पास स्थित एक फैक्ट्री तक पहुंचाया जाना था। माल को सुरक्षित पहुंचाने के बदले आरोपियों को तय कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार आरोपी लीसे के परिवहन से संबंधित कोई वैध रवन्ना अथवा लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके बाद पुलिस ने बरामद माल को अवैध मानते हुए कार्रवाई शुरू की।
कई जिलों से होकर गुजरी बस फिर भी नहीं पकड़ी गई
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि बस को द्वाराहाट से सीधे बाजपुर नहीं लाया गया बल्कि तस्करों ने कई स्थानों और मार्गों से होकर इसे गंतव्य तक पहुंचाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक बस चौखुटिया और गैरसैंण होते हुए कर्णप्रयाग पहुंची। इसके बाद यह ऋषिकेश, नजीबाबाद, धामपुर, जसपुर और काशीपुर होते हुए पुलभट्ठा की ओर जा रही थी।
इतने लंबे रूट पर कई स्थानों से गुजरने के बावजूद बस के सुल्तानपुर पट्टी तक पहुंचने का मामला अब पुलिस की जांच के दायरे में है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बस का इस्तेमाल इससे पहले भी लीसे के अवैध परिवहन में किया गया था या नहीं।
चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में बिठोरिया मुखानी हल्द्वानी निवासी मनोज सिंह, देवली लमगड़ा निवासी भवान सिंह, बिंदुखत्ता लालकुआं निवासी हेमचंद्र महतोलिया और जैती लमगड़ा निवासी पान सिंह को गिरफ्तार किया है। उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह की तहरीर पर कोतवाली बाजपुर में आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस बरामद लीसे के स्रोत, इसे उपलब्ध कराने वाले लोगों और इसे खपाने वाली फैक्ट्री सहित पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। साथ ही बस के मालिक की भूमिका और उसके स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में जुटी पुलिस
पुलिस की जांच अब सिर्फ चार आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि लीसा कहां से निकाला गया इसे बस में किसने लोड कराया इसके पीछे कौन लोग हैं और पुलभट्ठा की फैक्ट्री तक पहुंचने के बाद इसे किसके सुपुर्द किया जाना था।
बस की सीटें निकालकर बड़ी संख्या में कनस्तरों को छिपाने की व्यवस्था किए जाने से पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे एक सुनियोजित नेटवर्क हो सकता है। जांच में यदि बस के पूर्व में भी इस तरह इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होती है तो मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सीओ बाजपुर अखलेश कुमार ने बताया कि अवैध लीसे के साथ गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस बस मालिक के बारे में भी जानकारी जुटा रही है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
कारवाई करने वाली पुलिस टीम
कार्रवाई करने वाली टीम में उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल जगत सिंह अधिकारी, कांस्टेबल नवल किशोर, कैलाश काला और रमेश पांडे शामिल रहे।