थराली में कागजों में बन गई सड़क धरातल पर काम अधूरा 16 करोड़ के भुगतान पर उठे सवाल।

न्यूज़ 13 प्रतिनिधि अरुण मिश्रा चमोली

चमोली/ जिले के थराली विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वारा बनाई गई कंडवाल गांव से कफूली मल्ला मोटर मार्ग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने आरोप लगाया है कि लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क का ज्यादातर कार्य धरातल पर अधूरा है जबकि कागजों में निर्माण पूरा दिखाकर ठेकेदार को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। पार्टी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए लोक निर्माण विभाग से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि मोटर मार्ग के निर्माण पर लगभग 16 करोड़ रुपये खर्च दर्शाए गए हैं परन्तु मौके पर सड़क की स्थिति दावों के उलट है। उनका आरोप है कि पूरे मार्ग में केवल दो से तीन किलोमीटर हिस्से पर ही पीसी (प्रीमिक्स कारपेट) कार्य दिखाई देता है जबकि बाकी हिस्से में निर्माण अधूरा है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पिछले तीन वर्षों से उच्चाधिकारियों को पूरी रिपोर्ट भेजी जाती रही है। सेमवाल ने मामले में संबंधित जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता को तत्काल निलंबित करने तथा सभी निर्माण संबंधी अभिलेखों, माप पुस्तिकाओं (एमबी) और भुगतान फाइलों को सील करने की मांग उठाई।

प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है और शिकायतों के बावजूद क्षेत्रीय लोगों को संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

पार्टी के पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश ईष्टवाल ने लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की विशेष भौतिक एवं वित्तीय ऑडिट कराई जानी चाहिए ताकि भुगतान और वास्तविक कार्य का मिलान हो पाए। वहीं जिला सैनिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष भगवती प्रसाद गोस्वामी ने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पत्रकार वार्ता में महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष शशि रावत, सुरेंद्र सिंह चौहान, गिरीश भद्री आदि पदाधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों पर संबंधित विभाग या अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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