नैनीताल विधायक सरिता आर्या पर लगे गंभीर आरोप मंदिर में कसम खाकर भी नहीं करती विकास कार्य प्रधान प्रतिनिधि ने आगामी चुनावों में सरिता आर्या के बहिष्कार का किया एलान।
नैनीताल विधायक सरिता आर्या पर लगे गंभीर आरोप मंदिर में कसम खाकर भी नहीं करती विकास कार्य प्रधान प्रतिनिधि ने आगामी चुनावों में सरिता आर्या के बहिष्कार का किया एलान।
नैनीताल/ नैनीताल जिले के बेतालघाट विकास खंड के लोहाली ग्राम पंचायत से एक बड़ा सियासी विवाद सामने आया है यहां ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिभुवन बिष्ट ने विधायक सरिता आर्या पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर की गई एक लंबी पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान विधायक ने उन्हें मां कोकिला देवी मंदिर में बुलाकर भावुक अंदाज में अपने प्रत्याशी यानी अपने पुत्र रोहित आर्या के लिए सहयोग मांगा था।
प्रधान प्रतिनिधी के मुताबिक विधायक ने मंदिर में हाथ जोड़कर उनसे समर्थन की अपील की और कहा कि यह उनकी इज्जत का सवाल है। साथ ही उन्होंने मां के दरबार को साक्षी मानते हुए वादा किया कि वे लोहाली में जनता दरबार और बहुउद्देशीय शिविर लगाएंगी तथा ग्राम पंचायत के विकास में पूरा सहयोग देंगी। इन बातों पर विश्वास करते हुए त्रिभुवन बिष्ट ने और ग्राम वासियो ने उनका साथ दिया जिसका परिणाम यह रहा कि अन्य बूथों पर हार के बावजूद लोहाली बूथ से उनके प्रत्याशी को जीत मिली। भले ही वो जिलापंचायत सदस्य नही बन पाए। प्रधान पति का आरोप है कि चुनाव के बाद विधायक ने न तो कोई संपर्क किया और न ही किए गए वादों को निभाया।
उन्होंने कहा कि कई बार व्यक्तिगत रूप से और बंद कमरे में भी उन्हें इस बारे में याद दिलाया गया परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे आहत होकर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें केवल “यूज एंड थ्रो” के तौर पर इस्तेमाल किया गया। त्रिभुवन बिष्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पहले की तरह भारतीय जनता पार्टी के समर्थक हैं और आगे भी रहेंगे लेकिन विधायक के व्यवहार ने उन्हें अंदर तक आहत किया है
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगामी चुनाव में फिर से सरिता आर्या को टिकट दिया जाता है तो लोहाली समेत दो ग्रामसभाओं के लोग नोटा का विकल्प चुनेंगे अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने मां कोकिला देवी से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि भगवान और शक्ति से बड़ा कोई नहीं है और उन्हें पूरा विश्वास है कि न्याय जरूर होगा। यह मामला अब क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले समय में इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।