उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को पद्म विभूषण देने पर बबाल शिवसेना ने खड़े किए सवाल।

न्यूज 13 प्रतिनिधि देहरादून

देहरादून/केंद्र सरकार ने रविवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री विजेताओं के नामों की घोषणा की। जिसमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों के नाम शामिल हैं। इसमें वरिष्ठ भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से नवाजा गया है। इस पर उद्धव ठाकरे शिवसेना (उबाठा) ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

यह भी पढ़ें 👉 उत्तराखंड में फिर से बदलेगा मौसम बारीश के साथ बर्फबारी का होगा न्याय दौर शूरु।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को सार्वजनिक क्षेत्र में पद्म भूषण पुरस्कार मिला है। इसके लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित तमाम नेताओं ने उन्हें बधाई दी। परन्तु कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भाजपा सरकार को घेरा। शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, महाराष्ट्र में लोकतंत्र और भारतीय संविधान की हत्या करके शिंदे-बीजेपी सरकार बैठाने के बदले मोदी सरकार ने इन महाशय (भगत सिंह कोश्यारी) को पद्म भूषण से नवाजा है।

यह भी पढ़ें 👉 जिलासु की चंडिका भगवती मां पहुंची गौचर भक्तों ने किया स्वागत।

राउत ने आगे कहा कि यह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा फुले जैसे महापुरुषों का अपमान किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा महाराष्ट्र का अपमान करने वालों का बीजेपी सम्मान कर रही है! बहुत बढ़िया ।

अक्सर विवादों में रहे कोश्यारी

भगत सिंह कोश्यारी का महाराष्ट्र में 2019 से 2023 तक राज्यपाल के तौर पर कार्यकाल बेहद उतार-चढ़ाव भरा और विवादों से घिरा रहा।

यह भी पढ़ें 👉 सोमेश्वर, रहस्यमय तरीके से लापता हो गए एड़ाधो धाम के महंत बिशम्बर गिरी कार में लगी मिली चाबी मोबाइल फोन बंद क्षेत्रीय लोग आशंकित।

एक कार्यक्रम में उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को पुराने जमाने का आदर्श बताया था जिस पर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हुए थे। वहीं महान समाज सुधारक महात्मा जोतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के बाल विवाह पर की गई उनकी टिप्पणी ने भी विवाद खड़ा कर दिया था। 2019 में देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को सुबह-सुबह शपथ दिलाने का मामला भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ था। तब 72 घंटे में फडणवीस की अल्पमत सरकार गिर गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *