20 नवंबर को विधानसभा सीट पर वोटिंग होगी और 23 नवम्बर को मतगणना होगी।
29 अक्टूबर से नामांकन और चार नवम्बर तक नाम वापसी का मौका मिलेगा।
विधायक शैला रानी रावत के निधन के बाद खाली हुई केदारनाथ सीट पर यह उपचुनाव कई मायनों में नाक और साख की लड़ाई माना जा रहा है। बदरीनाथ उपचुनाव हारने के बाद भाजपा यहां कोई कसर नही छोड़ना चाहती। यही वजह है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री धामी ने विधानसभा क्षेत्र के लिए ताबड़तोड़ घोषणाएं की हैं।
बदरीनाथ और मंगलौर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार से सबक ले चुकी है और विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती। केदारघाटी के बाजारों, कस्बों और गांवों में भाजपा का सक्रिय जनसंपर्क जारी है। भाजपा यहां जीत का परचम लहराती है तो ये राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मौहर साबित होगा। लेकिन अगर हार मिलती है तो फिर सरकार संगठन और नेतृत्व में उथल पुथल मचनी तय है।
वहीं दुसरी ओर कांग्रेस के लिए भी केदारनाथ में जीत दर्ज करके अपनी प्रतिष्ठा बचाने का सुनहरा मौका है। हाल ही में हरियाणा में मिली हार से कांग्रेस हताश जरूर है लेकिन अगर केदारनाथ में उपचुनाव जीत जाती है तो ये उसके लिए संजीवनी से कम नही होगा।
कांग्रेस यहां यात्रा मार्ग पर आपदा का मुद्दा भुनाना चाहेगी साथ ही केदारनाथ धाम में निर्माण कार्यों की लापरवाही मंदिर के गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाने के मुद्दे पर भी चुनावी माहौल गरमाने के आसार हैं।