नैनीताल/ नैनीताल के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लगभग 300 लोग बीमार हैं जबकि 2 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और सक्रियता को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब क्षेत्र की जनता इतनी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही है तब उनकी समस्याओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या इस गंभीर संकट के बीच जनता के बीच कितनी सक्रिय हैं। हालिया गतिविधियों को लेकर लोगों का आरोप है कि विधायक कभी नैनीताल में फिल्म से जुड़े कार्यक्रमों में नजर आती हैं तो कभी हल्द्वानी में राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त दिखाई देती हैं।
हालांकि इन आरोपों और विधायक की वास्तविक स्थिति पर उनका पक्ष सामने आना भी जरूरी है। जनता के सवालों का जवाब देना और संकट की घड़ी में क्षेत्रवासियों के बीच मौजूद रहना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी मानी जाती है। ज्योलिकोट के लोग अब सवाल कर रहे हैं जब सैकड़ों लोग बीमार हैं और दो लोगों की मौत हो गई है तो इस गंभीर संकट की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा और प्रभावित परिवारों को राहत कब मिलेगी? जनता ने जिन उम्मीदों के साथ अपने प्रतिनिधि को चुना था आज वही जनता खुद को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस करने की बात कह रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं।