चमोली/ सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार सड़क की मांग करने के बावजूद जब गांव तक सड़क बनी तो ग्रामीणों ने खुद ही गेती, फावड़ा, बेलचा और अन्य औजार उठा लिए ग्रामीणों ने अपने निजी संसाधनों और श्रमदान से गांव तक सड़क निर्माण का बेड़ा उठा लिया है जब आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला ग्रामीणों का कहना है कि गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वे लंबे वक्त से शासन-प्रशासन जिलाधिकारी और विधायक सहित संबंधित अधिकारियों को पत्राचार करते आ रहे हैं।
परन्तु अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बाद भी ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिले। सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पैदल आवाजाही करनी पड़ती है सबसे ज्यादा परेशानी बीमार, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ती है किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है इसके बाद ही वाहन के जरिए उसे कर्णप्रयाग तक ले जाना संभव हो पाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क सुविधा नहीं होने का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने जरूरी सामान गांव तक लाने और आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कत होती है ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से मांग और पत्राचार के बावजूद जब सड़क नहीं बनी तो अब उन्होंने अपने स्तर से निर्माण शुरू करने का फैसला लिया है ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम सरकार और शासन-प्रशासन को आइना दिखाने के लिए उठाया गया है उनका कहना है कि जब ग्रामीण अपने सीमित संसाधनों से सड़क बनाने को मजबूर हो सकते हैं तो जिम्मेदार विभागों को भी गांव की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि सकंड गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए जल्द ठोस कार्रवाई की जाए और सड़क निर्माण को सरकारी स्तर पर स्वीकृति देकर कार्य शुरू कराया जाए।
ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी, सरस्वती देवी समेत अन्य ग्रामीण अपने स्तर से सड़क निर्माण में जुटे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए कई बार सर्वे किए गए, लेकिन इसके बावजूद सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया, आज भी ग्रामीणों को करीब नौ किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, ग्रामीणों ने बताया कि मांग को लेकर जनवरी में पांच और छह जनवरी को आंदोलन भी किया गया था विधायक अनिल नौटियाल के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने दो दिन बाद आंदोलन समाप्त कर दिया था।
ग्रामीणों के मुताबिक विधायक ने तीन माह के अंदर सड़क का सर्वे कराने और जल्द सड़क कटिंग का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था परन्तु समय बीतने के बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव बहिष्कार की स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।