देहरादून/ धनतेरस और स्कूलों की छुट्टी के बीच अपने घर जाने के निकले यात्रियों को देहरादून में बसों के लिए भटकना पड़ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के बीच बसों की उपलब्धता पर उठे सवाल सुबह 5 बजे से परेशान हैं यात्री। त्योहार आम आदमी के लिए होता है परिवार के साथ
खुशियां बांटने के लिए लेकिन जब त्योहार पर घर जाने के लिए बस तक न मिले तो सारी खुशी परेशानी में बदल जाती है। देहरादून के आईएसबीटी में शुक्रवार सुबह कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। धनतेरस और स्कूलों की छुट्टी के चलते बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को जाने के लिए सुबह लगभग पांच बजे से ही आईएसबीटी पहुंचने लगे परन्तु यात्रियों को बसों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
किसी को परिवार के साथ धनतेरस मनानी है तो किसी को दीपावली पर अपने घर पहुंचना है। नौकरी और कामकाज के बीच मुश्किल से छुट्टी निकालकर घर जाने की तैयारी करने वाले लोगों के लिए यह इंतजार किसी मुसीबत से कम नहीं है। सवाल यह है कि जब त्योहारों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने का अंदाजा पहले से था तो अतिरिक्त बसों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
रैली के लिए बसें ताकि भीड़ जुटाई जा सके ऐसे में आम जनता घर कैसे पहुंचे
आज उत्तराखंड में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का दौरा है देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रस्तावित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटाने की तैयारियां हैं। इसी बीच आईएसबीटी में बसों की कमी ने परिवहन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी हैं।
यात्रियों का आरोप है कि रैली में लोगों को लाने-ले जाने के लिए बसों को लगाया जा रहा है जिसके कारण आम यात्रियों को पर्याप्त बसें नहीं मिल पा रही हैं। यदि राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है तो आम जनता के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना भी प्रशासन और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है।
आखिर यह कैसी व्यवस्था है जिसमें नेताओं के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इंतजाम तो किए जाते हैं परन्तु त्योहार पर घर जाने के लिए निकले आम लोगों की परेशानी का समाधान नहीं दिखाई देता।
क्या जनता सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए है या उसकी सुविधाएं भी जरूरी हैं।
राजनीतिक दलों और नेताओं के कार्यक्रम होते रहेंगे। रैलियां होंगी भाषण होंगे और भीड़ जुटाने की तैयारियां भी होंगी। लेकिन इन सबके बीच आम आदमी की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जिस जनता के नाम पर राजनीति होती है उसी जनता को त्योहार के दिन बसों के लिए भटकना पड़े तो व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाना लाजिमी है।
परिवहन विभाग और प्रशासन से सवाल
धनतेरस और दीपावली की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसें क्यों नहीं लगाई गईं?
रैली के लिए बसें उपलब्ध कराने के साथ आम यात्रियों की व्यवस्था किसने सुनिश्चित की?
सुबह से परेशान यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए क्या वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं?
क्या त्योहारों पर आम जनता की सुविधा राजनीतिक कार्यक्रमों से कम महत्वपूर्ण हो गई है?
नेताओं के कार्यक्रम महत्वपूर्ण हो सकते हैं लेकिन जनता की परेशानी उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है। रैली में कितनी भीड़ पहुंची यह राजनीतिक सफलता का पैमाना हो सकता है लेकिन आम जनता कितनी परेशान हुई यह भी व्यवस्था की जवाबदेही का हिस्सा होना चाहिए। धनतेरस पर घर जाने के लिए निकले लोगों का सवाल सीधा है – जब जनता के लिए ही व्यवस्था होनी चाहिए तो फिर त्योहार पर जनता को ही क्यों इंतजार करना पड़ रहा है प्रशासन और परिवहन विभाग को इस परेशानी का तत्काल समाधान करना चाहिए।