धाकड़ धामी के आदर्श जनपद चम्पावत में पशुपालकों की दुर्दशा हुई उजागर बीजेपी नेता ने ही उठाए सवाल पशुपालकों का दूध 28 रुपए किलो और पानी की बोतल 20 रुपए की।
धाकड़ धामी के आदर्श जनपद चम्पावत में पशुपालकों की दुर्दशा हुई उजागर बीजेपी नेता ने ही उठाए सवाल पशुपालकों का दूध 28 रुपए किलो और पानी की बोतल 20 रुपए की।
चम्पावत/ सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती रही है परन्तु मुख्यमंत्री धामी के मॉडल जिले चम्पावत में ग्रामीण किसानों और पशुपालकों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। पशुपालन से जुड़े किसानों को जहां पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है वहीं उनके दूध की उचित कीमत भी नहीं मिल रही है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता ने वीडियो जारी कर खोली व्यवस्था की पोल
पशुपालकों की इस परेशानी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता राजेश बिष्ट ने एक वीडियो जारी किया है।
वीडियो के जरिए उन्होंने जिले के ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों की पीड़ा को सामने रखते हुए सरकार और संबंधित व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजेश बिष्ट का कहना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है परन्तु जब पशुपालक को अपने पशुओं के लिए पर्याप्त चारा तक उपलब्ध नही हो रहा है और दूध का वाजिब मूल्य भी नही मिल रहा है। इससे स्पष्ट होता है किसानों की आय बढ़ाने के दावे जमीनी हकीकत से बहुत दूर नजर आते हैं।
30-32 रुपये लीटर दूध और बाजार में 20 रुपये की पानी की बोतल
राजेश बिष्ट ने दूध के दाम को लेकर भी एक बेहद दिलचस्प तुलना सामने रखी है। उनका दावा है कि जिले में पशुपालकों का दूध आंचल डेयरी में लगभग 30 से 32 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है। कभी कभार 28 रुपए लीटर भी बिक रहा है। वहीं दूसरी ओर बाजार में पानी की एक बोतल 20 रुपये में मिलरी है।
उनका सवाल है कि जिस किसान और पशुपालक की मेहनत से दूध लोगों की रोजमर्रा की जरूरत पूरी करता है उसी किसान को उसके उत्पाद का पर्याप्त मूल्य क्यों नहीं मिल रहा अगर बात करें किसान के उसी दूध की तो आंचल उस दूध से फैट निकालकर पैकेट में बंद करता है और बाजार में 70 रुपए लीटर बेच रहा है।
ग्रामीण पशुपालक आखिर कैसे बढ़ाए अपनी आय
राजेश बिष्ट का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी निर्भर हैं। पशुओं के लिए चारा जुटाना उनकी देखभाल करना और दूध उत्पादन करना किसान के लिए लगातार बढ़ते खर्च का काम है। ऐसे में यदि किसान को उसके दूध के उचित दाम नहीं मिलेगे और पशुओं के लिए पर्याप्त चारा भी उपलब्ध नहीं कराया जाएगा तो किसानों और पशुपालकों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य जमीन पर कैसे हासिल होगा यह बड़ा सवाल है।
मुख्यमंत्री धामी के मॉडल जिले में ही उठ रहे सवाल
चम्पावत को मॉडल जिला बनाने के सरकार द्वारा हमेशा दावे किए जाते है।
ऐसे में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों की समस्याओं को लेकर सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेता की ओर से सवाल उठाया जाना सरकार और संबंधित विभागों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। राजेश बिष्ट के बयान ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि सरकारी योजनाओं और घोषणाओं का वास्तविक लाभ गांव के उस किसान तक कितना पहुंच रहा है जो खेती के साथ पशुपालन कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है ?
दूध के दाम पर सरकार से जवाब की उम्मीद
पशुपालकों के सामने चारे की उपलब्धता दूध का खरीद मूल्य और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर होगी कि दूध के खरीद मूल्य को लेकर सरकार और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए धरातल पर क्या व्यवस्था की जाती है । राजेश बिष्ट के वीडियो के बाद चम्पावत के पशुपालकों की समस्याएं एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
अब देखना होगा कि धामी के मॉडल जिले में पशुपालकों की इस पीड़ा पर जिम्मेदार विभाग कितनी गंभीरता दिखाते हैं ।
दर्द किसानों का सवाल सरकार से और पोल व्यवस्था की खुल गई
राजेश बिष्ट सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ता हैं लेकिन उनका मकसद अपनी व किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचाना है। परन्तु सरकार को आईना दिखाते-दिखाते उनकी बातों में सरकारी दावों की तस्वीर भी साफ नजर आने लगी। यानी दर्द किसानों का था सवाल सरकार से था और पोल व्यवस्था की खुल गई।
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