उत्तरकाशी में खस्ताहाल सड़कें आपदा के बीच डंडी-कड़ी के सहारे मरीज, 18 वर्षों से डामरीकरण की बाट जोह रही भण्डारस्यूं सड़क, अब ग्रामीणों का 207 में चुनाव बहिष्कार का एलान।
उत्तरकाशी में खस्ताहाल सड़कें आपदा के बीच डंडी-कड़ी के सहारे मरीज, 18 वर्षों से डामरीकरण की बाट जोह रही भण्डारस्यूं सड़क, अब ग्रामीणों का 207 में चुनाव बहिष्कार का एलान।
उत्तरकाशी/ उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों की बदहाली और मानसूनी के साथ आपदा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। एक ओर जहां उत्तरकाशी जनपद के भण्डारस्यूं जिला पंचायत वार्ड नंबर-11 में मूलभूत सड़क सुविधाओं के अभाव से क्षुब्ध ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान करके आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। तो वहीं दूसरी ओर जनपद के मोरी विकासखंड समेत दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश भू-धंसाव और मलबे से सड़कें बंद होने के कारण मरीजों को डंडी-कंडी के सहारे
किलोमीटरों पैदल चलकर अस्पताल पहुचाना पड़ रहा है जो विकास के दावों की पोल खोलता है।
18 साल से डामरीकरण अधूरा, सीमा विवाद में फंसी सड़कें
भण्डारस्यूं क्षेत्र का डांग से ओल्या होते हुए मसून तक जाने वाला कल्याणी-स्यालना मोटरमार्ग पिछले 17-18 वर्षों से
डामरीकरण का इंतजार कर रहा है। सड़क का शुरुआती निर्माण कार्य तो हो चुका है परन्तु डामरीकरण न होने से बारिश में यह मार्ग कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ यही मार्ग नहीं बल्कि समूचे भण्डारस्यूं क्षेत्र की सड़कें उपेक्षा का शिकार हैं। इसके अलावा, ओल्या ग्राम पंचायत का बल्ला गांव वर्षों से जखारी-बल्ला और ओल्या-बल्ला मोटरमार्ग की स्वीकृति की राह देख रहा है जो गंगोत्री और यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्रों के प्रशासनिक उलझन में अटका पड़ा है।
नालूपानी-पटारा, सरतली, पुजारगांव और हरेती से जिनेथ होते हुए पैंथर मोटरमार्ग जैसी अन्य कई योजनाएं भी लंबे वक्त से अधर में लटकी हैं।
ग्राम प्रधान संगठन ने दी चेतावनी सौंपा जाएगा औपचारिक ज्ञापन
नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए जिला प्रधान संगठन उत्तरकाशी की जिला उपाध्यक्ष रेखा भट्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भण्डारस्यूं वार्ड की सभी लंबित सड़क योजनाओं पर जल्द ठोस कार्रवाई और डामरीकरण का कार्य शुरू नहीं किया गया तो सभी ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर जिलाधिकारी उत्तरकाशी को विधानसभा चुनाव बहिष्कार का औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मोरी विकास खंड में बारिश और भूस्खलन का कहर, डंडी-कंडी के सहारे मरीज
जनपद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
मोरी विकासखंड के रेक्चा गांव में पिछले एक सप्ताह से सड़क बंद होने के कारण तबीयत बिगड़ने पर सपना नाम की एक बीमार महिला जिनका दो माह का शिशु भी है को ग्रामीणों ने लगभग पांच किलोमीटर तक डंडी-कंडी पर बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुचाया, जहा से हंस फाउंडेशन की एंबुलेंस के जरिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी पहुचाया गया।इसके अलावा, कलाप गांव में अतिवृष्टि के बाद भू-धंसाव और पत्थरों के गिरने से भारी खतरा पैदा हो गया है। गांव में पिछले दस दिनों से बिजली और पाच दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप है साथ ही राशन की आपूर्ति भी बाधित है। पैर फ्रैक्चर होने पर गांव की शुभनी देवी को चार किलोमीटर तक क्षतिग्रस्त पगडंडी और उफनाते नालों के बीच से पैदल सड़क तक पहुचाया गया।
अस्थायी पुलिया बहने से कई गांवों का संपर्क कटा
सांकरी-ओसला मोटर मार्ग पर गियांगाड नाले का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों द्वारा बनाई गई अस्थायी पुलिया भी बह गई। इस दौरान ओसला निवासी खजान सिंह तेज बहाव में बह गए
और पेड़ की टहनी पकड़कर अपनी जान बचाई। पुलिया बहने से ओसला गंगाड़, ढाटमीर और पवाणी गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। मजबूरी में लोग तेज बहाव वाले नाले पर गिरे पेड़ के सहारे आवाजाही कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई की टीमें मशीनों के साथ तैनात हैं। सभी बंद ग्रामीण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों को जल्द राहत मिल पाए।