अल्मोड़ा/ उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में एक बार फिर वन्यजीव के हमले ने एक परिवार को बर्बाद कर दिया। ग्रामसभा तड़म के बौरंगा तोक में बाघ या तेंदुआ के हमले में स्थानीय ग्रामीण महिपाल सिंह मेहरा की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत के साथ आक्रोश का माहौल बना दिया है।
ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और सुरक्षा के मद्देनजर मोहान सफारी जोन को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का बड़ा फैसला लिया गया है।
ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
घटना रविवार की है जब महिपाल सिंह मेहरा जंगल के पास स्थित अपने क्षेत्र में थे इसी बीच अचानक घात लगाकर बैठे वन्यजीव ने उन पर हमला कर दिया। हमले में महिपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। जैसे ही यह खबर गांव में फैली सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए।
आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में लंबे वक्त से बाघ और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ गई थी परन्तु विभाग ने बार-बार चेतावनी के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि वन विभाग केवल सफारी और पर्यटन पर ध्यान दे रहा है जबकि जंगल किनारे बसे ग्रामीणों की सुरक्षा को राम भरोसे छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों ने मांग की कि जब तक उनकी शर्तें नहीं मानी जातीं वे शव को वहां से हिलने नहीं देंगे।
“स्टाफ की कमी और ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मोहान सफारी जोन को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है।
वर्तमान स्टाफ को अब प्रभावित क्षेत्र में गश्त और सुरक्षा कार्यों में लगाया जाएगा।” – दीपक सिंह, डीएफओ अल्मोड़ा
प्रशासन के सामने रखी गई कड़ी शर्तें
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच चली घंटों की वार्ता में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ग्रामीणों ने मुख्य रूप से चार मांगें रखी थीं
1- हमलावर वन्यजीव को तत्काल आदमखोर घोषित कर उसे मार गिराया जाए।
2- मृतक के आश्रितों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
3- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
4- क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
डीएफओ दीपक सिंह और पुलिस प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों को शांत करने के लिए कई आश्वासनों पर लिखित सहमति दी। अधिकारियों ने हमलावर बाघ या तेंदुए को मारने के लिए ‘शूटआउट’ की अनुमति प्रदान की है। इसके लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ शूटरों की टीम को मौके पर तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा मृतक के परिजनों को सरकारी नियमानुसार मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को वन विभाग में समायोजित करने की बात कही गई है।
मोहान सफारी जोन बंद होने का कारण
ग्रामीणों ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया कि मोहान में सफारी जोन खुलने के बाद से वन्यजीवों की सक्रियता रिहायशी क्षेत्रों की ओर बढ़ी है। सफारी की गाड़ियों और शोर-शराबे के कारण जानवर अपने प्राकृतिक रास्तों से भटक कर गांवों का रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों के बढ़ते दबाव और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने मोहान सफारी जोन को अगले आदेश तक पूरी तरह बंद कर दिया है।
डीएफओ के मुताबिक यहां तैनात कर्मचारियों को अब गांव के रास्तों और जंगल की सरहद पर गश्त के लिए तैनात किया जाएगा।
सुरक्षा के लिए उठाए गए अन्य कदम
वन विभाग ने प्रभावित तड़ाम गांव और आसपास के क्षेत्रों में चार पिंजरे लगा दिए हैं। साथ ही वन्यजीव की पहचान और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दर्जनों कैमरा ट्रैप स्थापित किए गए हैं। कुमरिया से तड़ाम जाने वाले पैदल रास्तों पर सोलर लाइट लगाने और सड़क निर्माण में आ रही वन विभाग की तकनीकी आपत्तियों को हटाने पर भी सहमति बनी है। लंबी वार्ता और लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जाने दिया। महिपाल सिंह का पोस्टमार्टम मोहान स्थित वन विभाग चौकी में ही चिकित्सकों की एक विशेष टीम द्वारा किया गया। फिलहाल पूरे क्षेत्र में वन विभाग की टीमें तैनात हैं और ग्रामीणों से अकेले जंगल न जाने की अपील की गई है।