धाकड़ धामी के विवेकाधीन कोश की बंदरबांट आरटीआई में हुआ खुलासा किसान मंच उत्तराखंड का दावा।

न्यूज 13 प्रतिनिधि हल्द्वानी

हल्द्वानी/ उत्तराखंड में मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष -जो आपदा, बीमारी एवं आकस्मिक संकट से जूझ रहे जरूरतमंदों के लिए अंतिम सहारा माना जाता है अब गहरे सवालों के घेरे में है। किसान मंच उत्तराखंड ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की कर्मभूमि चंपावत और जन्मभूमि उधम सिंह नगर में ही इस कोष से बड़े पैमाने पर धनराशि का वितरण हुआ जिसमें पारदर्शिता, पात्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर शंकाएं पैदा होती हैं। संगठन ने इसे “विवेकाधीन नहीं, संपर्काधीन व्यवस्था” बताते हुए श्वेत पत्र और स्वतंत्र जांच की मांग की है।

यह भी पढ़ें 👉 श्रीनगर में जवान बेटी के अंतिम संस्कार के लिए नहीं मिल पाई सूखीं लकड़ी, फिर हिंदू रीति-रिवाज व मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ जाकर डिजल और टायर-ट्यूब जलाकर किया अंतिम संस्कार।

नैनीताल रोड स्थित एक निजी रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता में किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय संरक्षक पीयूष जोशी और प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान केवल दो जिलों- चंपावत और उधम सिंह नगर – में ही कुल ₹6,65,37,000 की राशि वितरित की गई। इनमें चंपावत में 1,359 लाभार्थियों को ₹2,65,05,000 और उधम सिंह नगर में 2,142 लाभार्थियों को ₹4,00,32,000 दिए गए। कुल 3,501 लाभार्थियों के ये आंकड़े मंच के अनुसार अपने आप सवाल खड़े करते हैं क्या यह मात्र संयोग है कि इतनी बड़ी राशि मुख्यमंत्री के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में केंद्रित रही या इसके पीछे चयन की प्रक्रिया में कोई पक्षपात है? किसान मंच का आरोप है कि इन आंकड़ों के अंदर एक “पैटर्न” दिखाई देता है जहां कई मामलों में एक ही व्यक्ति को दो-दो और तीन-तीन बार तक ₹50,000 से ₹2,00,000 की सहायता दी गई जबकि कई परिवारों के अलग-अलग सदस्यों को बार-बार लाभान्वित किया गया। इसके विपरीत वास्तविक गरीब और जरूरतमंद लोगों को मात्र ₹3,000 से ₹5,000 तक देकर औपचारिकता पूरी किए जाने का आरोप लगाया गया जिसे संगठन ने “गरीबों के साथ मजाक” और “संवेदनहीन व्यवस्था” की मिसाल बताया।

यह भी पढ़ें 👉 बागनाथ की धरती डोली भूकंप के झटकों से ऐतिहातन घरों से बाहर निकले लोग।

प्रेस वार्ता में मंच ने कई नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। किसान मंच के मुताबिक भाजपा के पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हयात सिंह मेहरा को ₹40,000, उधम सिंह नगर के विपणन बोर्ड सदस्य संतोष कुमार अग्रवाल को ₹5,00,000, भाजपा कार्यकर्ता मुकेश शर्मा को ₹50,000, चंपावत के एक अज्ञात “अध्यक्ष” को ₹2,00,000, भाजपा कार्यकर्ता राजेंद्र प्रसाद को ₹5,00,000 तथा टनकपुर के भाजपा नेता रोहित कुमार गुप्ता को ₹1,00,000 की सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त भाजपा कार्यकर्ता शांता बुटोला को ₹5,00,000 और रविंद्र सिंह को ₹50,000 दिए जो उल्लेख किया गया जबकि उधम सिंह नगर के भाजपा प्रभारी संजीव नेगी का नाम भी लाभार्थियों में शामिल बताए जाने का दावा किया गया।

संगठन ने बताया कि आरटीआई के माध्यम से पता चला कि एक अज्ञात व्यक्ति को ₹3,00,000 की सहायता दी गई जबकि चंपावत में निवास करने वाले दो ऐसे व्यक्तियों जिनके नाम के साथ “जिलाधिकारी” शब्द जुड़ा बताया गया को क्रमशः ₹3,00,000 और ₹1,75,000 दिए गए। किसान मंच ने कहा कि यदि यह तथ्य सही है तो यह मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष की पात्रता और नियमों पर सीधा प्रश्नचिह्न है और यह जानना आवश्यक है कि ऐसे व्यक्तियों को सहायता किस आधार पर स्वीकृत की गई।
इसके अलावा संगठन ने आरटीआई का हवाला देते हुए खुलासा किया कि चंपावत के पूर्व भाजपा अध्यक्ष प्रकाश तिवारी के परिवार – रमेश तिवारी, प्रकाश तिवारी, हेमा तिवारी और दीपक तिवारी – को कई बार सहायता दी गई।

यह भी पढ़ें 👉 चमोली जिले में अप्रैल में हो रही बर्फबारी से लुढ़का तापमान गर्म कपड़े निकालने को मजबूर हुए लोग।

साथ ही भाजपा से जुड़े कैलाश गहतोड़ी और महेश चंद्र गहतोड़ी को भी “भारी मात्रा” में लाभ मिलने की बात कही गई। मंच का कहना है कि इन उदाहरणों से यह संकेत मिलता है कि राहत कोष का लाभ सीमित दायरे में रहा जबकि वास्तविक जरूरतमंद हाशिए पर रहे। किसान मंच ने पारदर्शिता के मुद्दे को सबसे गंभीर बताते हुए कहा कि जब आरटीआई के तहत आवेदन पत्र अस्पताल बिल, वाउचर और इलाज से जुड़े दस्तावेज मांगे गए तो उन्हें निजी जानकारी बताकर देने से इनकार कर दिया गया। संगठन का सवाल है कि जब सार्वजनिक धन का उपयोग किया जा रहा है तो उससे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने में हिचक क्यों? मंच का कहना है कि जानकारी छिपाना स्वयं में कई बड़े सवालों को जन्म देता है।

इस पूरे विवाद को और गंभीर बनाते हुए किसान मंच ने भाजपा विधायक बिशन सिंह चुफाल के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके क्षेत्र के गरीबों की फाइलें लंबित हैं जबकि प्रभावशाली लोगों की फाइलें प्राथमिकता से पास की जा रही हैं। संगठन ने इसे सत्ता के भीतर उठती आवाज बताते हुए कहा कि यह केवल एक संगठन का आरोप नहीं बल्कि व्यवस्था के अंदर की वास्तविकता की झलक है।

यह भी पढ़ें 👉 चम्पावत जिले में एक साल में 93 करोड़ की शराब गटक गए जनपद वासी लेकिन लोग हैरान हैं आखिर इतनी शराब पी कौन रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा यह मामला सिर्फ आंकड़ों का नहीं है यह उन गरीब परिवारों के दर्द का मामला है जिन्हें राहत मिलनी चाहिए थी लेकिन वे सिस्टम से बाहर रह गए। मुख्यमंत्री की कर्मभूमि और जन्मभूमि में ही यदि इस तरह के सवाल उठ रहे हैं तो पूरे प्रदेश की स्थिति पर गंभीर चिंतन की जरूरत है। हम इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे।

संरक्षक पीयूष जोशी ने कहा मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष गरीबों के लिए जीवनरेखा होता है लेकिन जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं उससे यह व्यवस्था भरोसे के संकट में है। यदि सरकार को अपने काम पर विश्वास है तो उसे तुरंत श्वेत पत्र जारी कर पूरी सच्चाई सामने रखनी चाहिए नहीं तो जिस प्रकार एक अध्यक्ष जो कि अज्ञात है वह एक जिलाधिकारी नाम के अज्ञात व्यक्ति को पैसा बांटा गया वैसे हर अध्यक्ष हर संस्था के अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष से लेकर तमाम अध्यक्षों को मुख्यमंत्री राहत को उससे पांच-पांच लाख रुपए बांटे जाएं उन्होंने कहा कि वह संबंध में सीएजी चीफ जस्टिस विजिलेंस सहित प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को भी पत्र लिख जांच की मांग करेंगे। प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई ने कहा जब एक गरीब ईलाज के लिए भटकता है और उसे कुछ हजार रुपये देकर टरका दिया जाता है वहीं दूसरी ओर लाखों रुपये प्रभावशाली लोगों को दिए जाते हैं तो यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि संवेदनहीनता है। यह जनता के पैसे की बंदरबांट का मामला है।

प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने हाल ही में रक्षा मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धाकड़ और धुरंधर बताए जाने पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि व्यवस्था पारदर्शी है तो सरकार को बिना देरी किए इस कोष पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए और सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।

किसान मंच ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा और मामला प्रधानमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री तथा न्यायपालिका तक ले जाया जाएगा। प्रेस वार्ता के बीच किसान मंच के उपाध्यक्ष कमल तिवारी सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
अवधि: 2023-24 एवं 2024-25

जिला।

लाभार्थी संख्या |

कुल राशि (₹)

यह भी पढ़ें 👉 चम्पावत जिले के पाटी विकास खंड में देर रात रिहायशी घर में लगी भीषण आग 47 वर्षीय राजेन्द्र सिंह की ज़िंदा जलकर हुई दर्दनाक मौत।

चंपावत | 1,359 | 2,65,05,000

उधम सिंह नगर | 2,142 |

4,00,32,000

कुल | 3,501 | 6,65,37,000

नाम |

कथित पहचान |

राशि (₹)

हयात सिंह मेहरा | पूर्व राज्य मंत्री | 40,000

संतोष कुमार अग्रवाल | बोर्ड सदस्य | 5,00,000

मुकेश शर्मा | भाजपा कार्यकर्ता | 50,000

राजेंद्र प्रसाद | भाजपा कार्यकर्ता | 5,00,000

रोहित कुमार गुप्ता | भाजपा नेता | 1,00,000

शांता बुटोला | भाजपा कार्यकर्ता |

5,00,000

रविंद्र सिंह | भाजपा कार्यकर्ता |

50,000

अज्ञात “अध्यक्ष” 2,00,000

अज्ञात व्यक्ति 3,00,000

अज्ञात (चंपावत निवासी) 3,00,000

 अज्ञात (चंपावत निवासी)

1,75,000

एक ही परिवार को बार-बार लाभ (आरोप)

प्रकाश तिवारी परिवार (चंपावत)

रमेश तिवारी

प्रकाश तिवारी

हेमा तिवारी

दीपक तिवारी

(एकाधिक बार सहायता का आरोप)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *