गले में गहरा घाव (डीप नेक एब्सेस) से पीड़ित महिला की जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में हुई सफल सर्जरी।

न्यूज़ 13 प्रतिनिधि अरुण मिश्रा चमोली

चमोली/ रविवार को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम ने गले में गहरे घाव (डीप नेक एब्सेस) से जूझ रही 52 वर्षीय महिला की आपातकालीन सर्जरी कर उसकी जान बचाई।

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चमोली जिले के सुदूरवर्ती गांव झींझी (पोस्ट ऑफिस इराणी) की महिला भागा देवी पत्नी स्व. रूप सिंह लंबे समय से गले में दर्द, सूजन, तेज बुखार और निगलने में कठिनाई जैसी समस्या से परेशान थी। स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने उसे जिला अस्पताल तक पहुंचाने का निश्चय किया। आपदा के कारण गाँव का मोटर मार्ग कई स्थानों पर बाधित था, बावजूद इसके ग्रामीणों ने सहयोग कर मरीज को डोली में बैठाकर कठिन पैदल रास्तों से होते हुए अस्पताल पहुंचाया।

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अस्पताल में पहुचने पर मरीज की हालत नाजुक थी। जांच-पड़ताल के बाद डेंटल सर्जन डॉ. अनुराग सक्सेना, ईएनटी सर्जन डॉ. दिग्विजय बंडगर, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. नेहा नेगी, नर्सिंग स्टाफ ज्योति सिदोला, आशा बिष्ट, वंदना सती तथा हाउसकीपिंग स्टाफ राजा की टीम ने तत्परता और समन्वय के साथ ऑपरेशन शुरू किया। सर्जरी के दौरान मरीज के गले में पस का बड़ा जमाव पाया गया जिसे हटाकर संक्रमण फैलने से रोका गया। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है और उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।मरीज का इलाज सरकार की कल्याणकारी अटल आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क किया गया।

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ईएनटी सर्जन डॉ. दिग्विजय बंडगर ने जानकारी दी कि मैंने देश के विभिन्न महानगरों के बड़े अस्पतालों में सेवा दी है लेकिन उत्तराखंड सरकार द्वारा जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में स्थापित आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और अत्याधुनिक उपकरण आज मैदानी क्षेत्रों के कई अस्पतालों से भी बेहतर हैं। यहाँ रोगाणुरहित वातावरण, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों का सहयोग और कार्यकुशल स्टाफ की टीम ने इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

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महिला के परिजनों एवं ग्रामीणों ने जिला अस्पताल गोपेश्वर की चिकित्सक टीम और प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद महिला का सफल इलाज कर उसकी जान बचाई गई, जिसके लिए समस्त टीम बधाई की पात्र है।

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