लोहाघाट/ दैवीय आपदा मनुष्य के लिए किसी आपातकाल से कम नहीं होती है, जिसमें मानव को मानवीय सहयोग की जरूरत होती है। यही समय होता है जब पीड़ित इंसान के लिए इंसानियत दिखाने का मौका मिलता है। लेकिन नेपाल सीमा से लगे मझपीपल गांव में एक ऐसा मामला सामने आया है।
जिसमें आपदा मद के धन को ठिकाने लगाने के लिए गांव के सही सलामत पंचायत घर को ध्वस्त दिखाने का प्रयास किया गया है। जानकारी के अनुसार आपदा कंट्रोल रूम लोहाघाट में विगत 8 जुलाई को सुबह 11:28 बजे गांव के एक व्यक्ति जोगा सिंह बिष्ट पुत्र देव सिंह बिष्ट जो एक ठेकेदार भी है जिसकी जीएसटी पर भी सस्पेंस बना हुआ हैं उसके द्वारा सूचना दी गई कि गांव का पंचायत घर आपदा के कारण ध्वस्त हो गया है।
जब आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इसकी जानकारी ग्राम के समानित लोगो व अन्य लोगों से ली गई तो किसी प्रकार की आपदा होने पर सभी ने हैरानी जाहिर की। इसके बाद एसडीएम के आदेश पर ब्लाक के ग्राम पंचायत अधिकारी व जेई को मौके में भेजा गया तो पंचायत घर में किसी प्रकार की क्षति नहीं पाई गई। बाद में जिला अधिकारी के संज्ञान में यह बात आने पर उन्होंने इसे काफी गंभीरता से लिया तथा गांव के जोगा सिंह बिष्ट पुत्र देव सिंह बिष्ट, के विरुद्ध झूठी रिपोर्ट का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। ग्राम पंचायत अधिकारी दिनेश सिंह बिष्ट ने बीडीओ के आदेश पर पंचेश्वर कोतवाली में मामले से संबंधित तहरीर दी गई है।
पुलिस ने आईपीसी की धारा 177 के तहत मामला दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी है। मालूम हो कि इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से डीएम को एक ज्ञापन भी दिया गया था। जानकार लोगों का मानना है कि इस काम को अंजाम देने से पूर्व संबंधित विभागीय जेई की भूमिका की भी जांच किया जाना जरूरी है।