बुके नहीं, बुक अभियान को मिली नई पहचान, श्रीमद् भागवत गीता भेंट कर विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव का किया स्वागत, पहल की हुई सराहना।

न्यूज 13 प्रतिनिधि अरुण मिश्रा चमोली

चमोली/ स्वागत, सम्मान समारोहों और औपचारिक कार्यक्रमों में फूलों के बुके के स्थान पर पुस्तक भेंट करने की अभिनव पहल ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान को नई पहचान मिल रही है। चमोली जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत द्वारा शुरू की गई इस नवाचारी पहल के माध्यम से सम्मान की परंपरा को ज्ञान, संस्कार और पठन संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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इसी क्रम में मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने गौचर पहुंचीं विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव का श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर विद्यालयी शिक्षा सचिव ने ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान की सराहना की। यह पहल पुस्तकों के महत्व को रेखांकित करने के साथ ही समाज में ज्ञान और अध्ययन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश देती है।

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मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव नितेश कुमार झा तथा ग्राम्य विकास विभाग के अपर सचिव श्री मनोज गोयल का भी स्वागत श्रीमद्भागवत गीता देकर किया। पुस्तक के माध्यम से सम्मान की नई परंपरा आमतौर पर किसी अतिथि के स्वागत एवं सम्मान के लिए फूलों के बुके का उपयोग किया जाता है। हालांकि, बुके कुछ समय बाद मुरझा जाता है, जबकि पुस्तक अपने भीतर ज्ञान, विचार और अनुभवों का ऐसा संसार समेटे रहती है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक लाभान्वित हो सकता है। इसी विचार को केंद्र में रखकर ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान प्रारंभ किया गया है।

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चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने शिक्षा विभाग से जुड़े कार्यालयों और विद्यालयों में आयोजित होने वाले समारोहों, प्रतियोगिताओं तथा सम्मान कार्यक्रमों में बुके के स्थान पर पुस्तक भेंट करने की परंपरा अपनाने का आह्वान किया है। इस संबंध में जनपद के खंड शिक्षा अधिकारियों और उप शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए गए हैं।
पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल बुके नहीं, बुक’ अभियान का उद्देश्य केवल स्वागत की परंपरा में बदलाव करना नहीं, बल्कि पुस्तकों के प्रति सम्मान बढ़ाना और समाज में पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना है।

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पुस्तकों के आदान-प्रदान से विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य लोगों को उपयोगी साहित्य पढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है। साथ ही, यह पहल सम्मानित किए जाने वाले व्यक्ति को एक ऐसा उपहार प्रदान करती है, जिसका उपयोग वह लंबे समय तक कर सकता है। विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव द्वारा इस पहल की सराहना किया जाना अभियान के विचार को विशेष महत्व देता है। श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर स्वागत करने की यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा और पुस्तकों के महत्व को भी रेखांकित करती है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत की यह पहल संदेश देती है कि सम्मान केवल किसी व्यक्ति को उपहार देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माध्यम चुना जाना चाहिए जो ज्ञान, विचार और सकारात्मक सोच को आगे बढ़ाए। ‘बुके नहीं, बुक’ इसी सोच के साथ सम्मान की परंपरा को एक सार्थक दिशा देने का प्रयास है।

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