दिल्ली में 6 मौतों के बाद खुली एमसीडी की नींद अब 4 मंजिल से ऊंची अवैध इमारतें होगी सील।

न्यूज 13 ब्यूरो नई दिल्ली

नई दिल्ली/ दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से हुई 6 लोगों की मौत ने राजधानी में छात्रों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम एमसीडी अब हरकत में आया है और चार मंजिल से ऊंचे अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि चार मंजिल से अधिक ऊंचाई वाले सभी गैर-कानूनी निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। साथ ही कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाने की बात कही गई है। दोषी पाए जाने पर अधिकारियों की बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।

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यह सख्ती उस दर्दनाक हादसे के बाद सामने आई है जिसमें रविवार 6 सितंबर को सत्य निकेतन की एक पांच मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में छह लोगों की जान चली गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। रातभर चले राहत और बचाव अभियान में मलबे के बीच फंसे लोगों को बाहर निकाला गया और कम से कम 10 लोगों को सुरक्षित बचाया गया।

पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटा क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी में रहते हैं। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन इमारतों में युवा अपने भविष्य के सपने लेकर रह रहे थे।

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उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी ? बिल्डिंग गिरने के बाद एमसीडी की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। दिल्ली पुलिस ने कथित बिल्डिंग मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

 एबीवीपी का प्रदर्शन, एमसीडी को 24 घंटे का अल्टीमेटम

हादसे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी एमसीडी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली स्थित एमसीडी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की। एबीवीपी ने हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए एमसीडी को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

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संगठन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने और लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

एनएसयूआई भी मैदान में छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

वहीं कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआइ ने भी सत्य निकेतन में धरना दिया। संगठन की ओर से मौके पर लोगों को भोजन भी वितरित किया गया। एनएसयूआइ ने छात्रों को न्याय और सुरक्षित भविष्य मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।
एनएसयूआइ ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। संगठन का आरोप है।

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कि हॉस्टल की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को ऐसे पीजी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है।

 6 मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल जवाबदेह कौन?

सत्य निकेतन की यह घटना सिर्फ एक इमारत गिरने का हादसा नहीं बल्कि शहरी व्यवस्था अवैध निर्माण और छात्रों की सुरक्षा पर बड़ी चूक है। अब देखना यह होगा कि एमसीडी का सीलिंग अभियान सिर्फ आदेश और कागजों तक सीमित रहता है या वास्तव में उन इमारतों पर कार्रवाई होती है जहां नियमों को ताक पर रखकर लोगों और छात्रों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही है।

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