नैनीताल/ विधायक सरिता आर्यी के अपने पैतृक गांव में उठा रोड नहीं तो वोट नहीं का मुद्दा 5 साल के कार्यकाल पर जनता ने खड़े किए सवाल अपने ही गांव तक सड़क ठीक नही करा पाई विधायक विधानसभा के कई गांव आज भी सड़क, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय विधायक सरिता आर्या के पांच साल के कार्यकाल को लेकर जनता के बीच नाराजगी और सवाल उठने लगे हैं। विधानसभा के अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क और मूलभूत सुविधाओं को लेकर ग्रामीण लंबे वक्त से आवाज उठा रहे हैं परन्तु अब सबसे बड़ा सवाल खुद विधायक के अपने गांव से सामने आया है। भूमियाधार क्षेत्र में अक्सोड़ा वाहन मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। लंबे वक्त से सड़क के सुधारीकरण की मांग कर रहे ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन करके अपनी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क जर्जर हालत में है बार-बार मांग और शिकायत के बावजूद मार्ग की स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण रोजाना आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को होती है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों के अनुसार खराब सड़क के कारण वाहन दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
विधायक के अपने गांव में ही विकास पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि भूमियाधार क्षेत्र को विधायक सरिता आर्या का पैतृक गांव बताया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का सड़क को लेकर
आंदोलन और ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा सीधे तौर पर क्षेत्र में हुए विकास कार्यों पर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब विधायक अपने ही पैतृक क्षेत्र की सड़क की समस्या का समाधान नहीं करा पाईं तो विधानसभा के दूरदराज के गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना का काम भी करीब एक साल से अधूरा होने की बात कही है। सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। विधानसभा के कई गांव आज भी सड़क के इंतजार में विधायक के पांच साल के कार्यकाल को लेकर अब विधानसभा के दूसरे हिस्सों से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बेतालघाट क्षेत्र का कोटाधारिया गांव सड़क सुविधा से वंचित होने की बात कह रहा है। वहीं चड्यूला के तोक गांवों में हमकोट-सिमलढुंगा मोटरमार्ग का इंतजार बना हुआ है। नैनीताल विधानसभा का बासी गांव भी बेहतर सड़क सुविधा की मांग लंबे वक्त से कर रहा है। ऐसे कई गांव हैं जहां ग्रामीण लगातार सड़क और मूलभूत सुविधाओं के लिए जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं। विरोध करने वालों का सवाल है कि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी अगर गांवों की प्रमुख समस्याएं जस की तस हैं।
तो आखिर जनता विधायक के कार्यकाल को किस उपलब्धि के लिए याद करे?
अब जनता ने दिया चुनाव से पहले सीधा संदेश- ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’
अक्सोड़ा मार्ग को लेकर ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द सड़क का सुधारीकरण शुरू नहीं हुआ तो आगामी चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया जाएगा।
ग्रामीणों का नारा है-रोड नहीं तो वोट नहीं
इतना ही नहीं मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने जिला कार्यालय में क्रमिक अनशन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।
अब यह आंदोलन केवल एक सड़क का मामला नहीं रह गया है बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले नैनीताल विधायक सरिता आर्या के पांच साल के कार्यकाल और विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल बनता दिखाई दे रहा है। जहां एक ओर चुनावी माहौल बनने लगा है वहीं दूसरी ओर विधायक के अपने पैतृक गांव से ही उठी ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ की आवाज आने वाले चुनाव में कितना असर डालती है यह देखने वाली बात होगी।