थराली, आम आदमी के टैक्स के पैसों से 15 करोड़ में बन रही सड़क को खुद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे हैं लोकनिर्माण विभाग थराली के इंजिनियर डामरीकरण में भारी अनियमितताओ पर भड़के जनप्रतिनिधि।

न्यूज 13 प्रतिनिधि अरुण मिश्रा चमोली

थराली/ चमोली जिले के थराली विधानसभा क्षेत्र के ग्वालदम-नंदकेशरी मोटर मार्ग पर 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हो रहे सुधारीकरण और डामरीकरण कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। लगभग 13 साल बाद सड़क पर डामरीकरण शुरू हुआ है परन्तु निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। कहीं सड़क पर पानी जमा है तो कहीं नमी के बीच ही डामर बिछाया जा रहा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सोलिंग में मिट्टी के इस्तेमाल बंद नालियों और कलमट की बदहाली पर भी सवाल उठाए हैं। हैरानी की बात यह है कि मौके पर विभागीय इंजीनियरों की मौजूदगी के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि कार्य में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

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गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग संख्या-91 के ग्वालदम-नंदकेशरी मोटर मार्ग पर इन दिनों निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राज्य योजना के तहत 18 किलोमीटर सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए 15 करोड़ 6 लाख 17 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। आगामी नंदा देवी राजजात यात्रा के लिहाज से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है।

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 जिला पंचायत सदस्य कला देवी उर्फ कलावती ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। सोलिंग में रेत के बजाय मिट्टी के इस्तेमाल बंद नालियों की खराब स्थिति, बंद पड़े कलमट और सड़क से निकलने वाले मलबे को वन भूमि में डालने की शिकायतें उठाई गई हैं। वहीं कनिष्ठ प्रमुख थराली राजेश चौहान ने डामरीकरण के दौरान सड़क पर नमी और उचित दबाव से कॉम्पैक्टिंग नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ग्वालदम में सड़क का एलाइनमेंट ठीक नहीं होने से बरसात का पानी आवासीय भवनों में घुस रहा है।

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अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क पर पानी जमा है और नमी बनी हुई है तो ऐसी स्थिति में डामरीकरण क्यों किया जा रहा है? निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे विभागीय इंजीनियर इन परिस्थितियों को नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं जनप्रतिनिधियों ने साफ किया है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो क्षेत्रीय जनता के साथ आंदोलन किया जाएगा। अब देखना होगा कि लोक निर्माण विभाग इन आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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