उत्तराखंड के इस विधायक के गांव के अस्पताल में नहीं है कोई डॉक्टर 4 महीने से बंद है सड़क।

न्यूज 13 प्रतिनिधि उत्तरकाशी

उत्तरकाशी/ मोरी विकास खंड के गोविंद वन्य जीव
विहार क्षेत्र के लिवाड़ी, फिताड़ी, रेक्चा, कासला, राला गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वर्ष 2012 में शासन से जखोल लिवाड़ी 20 किमी मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2013 में पीएमजीएसवाई ने इस मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था लेकिन आज 13 वर्ष बीतने के बावजूद अभी तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य पूरा नही किया गया यह मोटर मार्ग शुरू से ही विवादों में रहा है। पीएमजीएसवाई ने प्रथम फेज का कार्य पूरा न कर इसका निर्माण कार्य एक प्राइवेट कम्पनी वेबकोस को सौंप दिया वेबकोस के लिए यह मार्ग कामधेनु बना हुआ है। इस मोटर मार्ग के निर्माण में ग्रामीण शुरू से ही भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि प्रथम फेज के निर्माण के वक्त से ही इसकी जांच की मांग करते आ रहे हैं।वर्ष 2013 से निर्माणाधीन इस मोटर मार्ग पर पीएमजीएसवाई ने प्रथम फेज में 16 किमी कासला तक ही कटिंग की है। चार किमी आगे लिवाड़ी गांव को छोड़ दिया गया उसके बाद द्वितीय फेज की विज्ञप्ति जारी कर एक प्राइवेट कंपनी वेबकोस को कार्यदायी संस्था बनाया गया। वेबकोस द्वारा भी यहां अभी तक लिवाड़ी गांव तक कटिंग का कार्य पूरा नही किया गया हालाँकि फिताडी कासला तक छोटे वाहनों की आवाजाही हो रही थी लेकिन गत चार महीने से क्षेत्र में भारी आपदा आने के कारण मोटर मार्ग बंद है जिससे ग्रामीण लगभग 12 से 15 किमी जखोल तक पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं मोटरमार्ग से इतनी दूरी होने के कारण बीमारी में ग्रामीण बीमार को डंडी, कंडियों के सहारे अस्पताल तक पहुंचाते हैं जिसमें अधिकांश मरीज तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। गत मंगलवार को कासला गांव निवासी एक प्रसव पीड़ित युवती ने भी रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

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यहां सड़क कटिंग का कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है और ना ही लिवाड़ी गांव के नीचे पुल का निर्माण किया गया कार्यदाई संस्था वेबकोस की कार्य प्रणाली पर शुरू से ही प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं पीएमजीएसवाई के वक्त जिस ठेकेदार ने प्रथम फेज का कार्य आधा अधूरा छोड दिया था वेबकोस कम्पनी ने भी द्वितीय फेज का कार्य उसी ठेकेदार को दे दिया विभाग तो बदल दिए लेकिन ठेकेदार वही हैं। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि यह बहुत ही सेंसेटिव क्षेत्र है और पूर्व में भूगर्भीय वैज्ञानिकों की रिपोर्ट की अनदेखी कर पीएमजीएसवाई द्वारा यहां भू धंसाव वाले क्षेत्र में सड़क का एलाइनमेंट (समरेखण) किया गया जिसके प्रतिफल यहां लगभग तीन किमी सड़क भू धंसाव व भूस्खलन की चपेट में है। भूगर्भीय वैज्ञानिकों ने अब यहां तीन किमी भू धंसाव वाले क्षेत्र में वेबकोस कंपनी को नई कटिंग करने से मना कर दिया है अब कम्पनी सड़क के नए एलाइनमेंट पर कार्य करने पर विचार कर रही है। उत्तरकाशी/ प्रसव पीड़िता की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग पर भी प्रश्नचिन्ह प्रसव पीड़िता की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। गत 07 जुलाई को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मानसून सीजन में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को दुरस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक बैठक में दूरस्थ क्षेत्रों में जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं देने और उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में सभी जरूरी इंतेज़ाम किए जाने के निर्देश दिये थे।

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जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी कार्यकत्री, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को दुरुस्त स्थानों में जाकर स्थलीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं की जानकारी एकत्रित करने और उनका समन्वित डेटा एकत्र करके निगरानी रखने के निर्देश दिए साथ ही किसी भी आपातकालीन स्थिति में संबंधित सूचनाएं समय से उच्चतर स्तर को दिये जाने को कहा था। जिलाधिकारी ने दुर्गम इलाके और मानसून के दौरान सड़क संपर्क में संभावित व्यवधानों को देखते हुए सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को दूरदराज के गांवों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओंको जिलाधिकारी ने दुर्गम क्षेत्रों और मानसून के दौरान सड़क संपर्क में संभावित व्यवधानों को देखते हुए सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को दूरदराज के गांवों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान करने और उनके साथ मजबूत संचार चैनल स्थापित करने के निर्देश भी दिए थे जिसमें समय पर जांच और प्रसव में सुविधा के लिए आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति परिवहन और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए समय पर स्थानांतरित करने का प्रावधान किए जाने के निर्देश भी दिये थे इसके बावजूद इस प्रसव पीड़ित महिला का चिन्हीकरण नही किया गया।

लकड़ी की बलियों के सहारे नदी नालों को आरपार करने को ही समझ लिया भाग्य

क्षेत्र के अधिकांश गांवों की आवाजाही आज भी लकड़ी की बनी पुलियों से हो रही है। बरसात के वक्त तो पुलिया बहने से ग्रामीण यहां गदेरों में लकड़ी की बलिया डाल देते हैं और इनके सहारे ही जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर है। मोरी विकास खंड के दो दर्जन से अधिक सीमांत गांव के लोगों को अभी भी गाड, गदेरों को पार करने के लिए कोई पक्के इंतजाम नही किए गए हैं। यहां के सम्पर्क मार्ग पर पड़ने वाले नदी नालों में लकड़ी की बनी पुलियों से आवाजाही करना अब इनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है।

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बरसात के समय नदी नालों पर बने यह लकड़ी के पुल बह जाने पर ग्रामीण यहां नदी नालों के आर पार बलिया डालकर आवाजाही करते हैं कई बार जनता दरबार से लेकर क्षेत्र पंचायत की बैठक में ये मामले उठते तो हैं परन्तु कोई भी कार्रवाई न होने के कारण वैसे ही दब जाते है। विधानसभा पुरोला क्षेत्र में विधायक दुर्गेश्वर लाल ने मोटर मार्गों के डामरीकरण, नवीनीकरण, मरम्मत, पुनर्निर्माण आदि के नाम पर अनगिनत सड़कों के लिए करोड़ों रूपए का बजट स्वीकृत कराया है जोकि अब तक की विधायकी का एक रिकॉर्ड है लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि जिन कार्यों के लिए मोटा बजट स्वीकृत हुआ है क्या उसके अनुरूप कार्य हो रहे हैं या नही मोरी विकास खंड के बंगाण क्षेत्र में आपदा के नाम पर किए जा रहे करोड़ों रुपए के कार्यों की जांच सहित पुरोला गुन्दियाट गांव, पुरोला नौरी सहित अनेक मोटर मार्गे की जांच की मांग भी लम्बे समय से उठ रही हैं परन्तु विधायक ने कभी भी इस पर मुह नही खोला और नैटवाड़ धौला दोणी भीतरी मसरी मोटर मार्ग में हो रहे घटिया गुणवता के कार्यों की दो बार वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर हाईलाइट कर दी जोकि सराहनीय है। लेकिन इसको लेकर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं कि 20 मई 2025 को बनाई गई वीडियो में क्या कार्रवाई की गई जिन पत्थरों को विधायक सड़क बनाने लायक या मानक के अनुरूप नही मान रहे थे क्या उन्हें हटाया गया या वहीं लगाए गए दूसरी वीडियो इसी महीने 05 अक्टूबर की है इसमें विधायक मोटर मार्ग की एसआईटी जांच कराने की बात कर रहे हैं अब देखना यह है कि इसमें एसआईटी जांच होती है या नही क्या विधायक अन्य सड़कों की जिनकी जांच की मांग हो रही है जांच करवायेंगे क्षेत्र के लोगों को इसका इंतजार रहेगा।

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