विकास पुरुष के नाम से विख्यात नोएडा का गठन करने वाले और सिडकुल की स्थापना करने वाले स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी का पुश्तैनी गांव आज तक नहीं जुड़ा सड़क से।
विकास पुरुष के नाम से विख्यात नोएडा का गठन करने वाले और सिडकुल की स्थापना करने वाले स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी का पुश्तैनी गांव आज तक नहीं जुड़ा सड़क से।
नैनीताल/ दिवंगत नारायण दत्त तिवारी को नोएडा के गठन का श्रेय दिया जाता है उनके उत्तर प्रदेश तथा बाद में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहने के दौरान राज्य में कई विकास कार्य हुए। परन्तु विडंबना यह है कि उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित उनका पुश्तैनी गाव आज तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया जिसके कारण यहा के लोग पलायन कर मैदानी क्षेत्रों में बसने को मजबूर हैं। तिवारी आज भी उत्तराखंड के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पाच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।
इससे पहले नोएडा का गठन भी उनके ही कार्यकाल के दौरान ही हुआ था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भी वे उल्लेखनीय रहे। बाद में उत्तराखंड में उन्होंने औद्योगिक विकास की पहल में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में ही स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (SIIDCUL)
की स्थापना हुई।
हालाकि वर्षों पहले कार्य स्वीकृत होने के बावजूद उनका अपना पुश्तैनी गाव आज तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है। राजनीतिक दलों की सीमाओं से परे विकास पुरुष कहलाने वाले तीवारी नैनीताल जिले के धारी विकास खंड के कुरई बमेटा जैसे गाव के छोटे से गांव से निकले थे। वर्ष 1982 में पदमपुरी से भवाली तक एक वैकल्पिक मार्ग के लिए सड़क के एलाइनमेंट और कटिंग कराने में तिवारी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सड़क की कटिंग और प्रारंभिक निर्माण तो महेशखान तक कर दिया गया था लेकिन डामरीकरण केवल क्विरा और बनलेखी गाँवों तक हुआ जो तीवारी के गाव से लगभग सात किलोमीटर पहले ही समाप्त हो जाता है।
ग्रामवासियों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी कार्य पूरा नहीं कर रहा है यह कहते हुए कि संबंधित क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जहा सड़कों से दूर बसे ग्रामीण आज भी रोजमर्रा की जरूरतों और आपात स्थितियों में कई किलोमीटर पैदल चलते हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरी सड़क परियोजना कई ग्रामीणों के पलायन का कारण बनी है।
सड़क न होने से रोजगार, पर्यटन, कृषि गतिविधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाए भी प्रभावित हो रही हैं। विडंबना यह है कि बड़े विकास कार्यों के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति के गाव की स्थिति भी इससे अछूती नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण लगभग 250 परिवार हल्द्वानी और लालकुआं तहसील क्षेत्रों में पलायन कर चुके हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक गाव में अब भी लगभग 15 परिवारों के लगभग 70/80 सदस्य रह रहे हैं जिनके घर गाव में दूर-दूर तक फैले हुए हैं।
गाव से हल्दूचौड़ क्षेत्र में पलायन कर चुके ग्रामीण प्रमोद बमेटा ने कहा भावर में बसे लोग आज भी गाव में स्थित ग्राम देवता की पूजा-अर्चना के अवसर पर गाव आते हैं। हालांकि सड़क न होने के कारण उन्हें बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकार विकास पुरुष के गांव को सड़क मार्ग से जोड़ दे तो वह तिवारी जी के रिवर्स पलायन के सपने को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।