रुद्रप्रयाग/ जनपद का शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है इस बार मामला किसी स्कूल की व्यवस्था का नहीं बल्कि खुद मुख्य शिक्षा अधिकारी के व्यवहार का है श्री वासुदेव जनता इंटर कॉलेज गंगानगर बांगर के प्रबंध समिति चुनाव में गड़बड़ी की शिकायत लेकर पहुंची एक महिला पत्रकार और उनकी साथी महिला ने सीईओ पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने और अपमानित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित महिलाओं ने इस पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी विशाल मिश्रा से करते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
यह पूरा विवाद एक इंटर कॉलेज के प्रबंधक चुनाव से जुड़ा है प्राप्त जानकारी के मुताबिक 7 मार्च 2024 को श्री वासुदेव जनता इंटर कॉलेज गंगानगर बांगर में साधारण सभा के सदस्य बनाने के लिए बाकायदा विज्ञापन निकाला गया था। इस विज्ञापन के बाद 178 लोगों ने बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से सदस्यता के लिए आवेदन किया था। नियमानुसार इन्हीं सदस्यों के बीच से प्रबंध समिति का चुनाव प्रबंध संचालक को कराना था।
लेकिन आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक सूचना और बिना कोई ठोस कारण बताए दिसंबर 2025 में प्रबंध संचालक ने एक नया विज्ञापन जारी कर दिया और पुराने 178 ड्राफ्टों को निरस्त कर दिया। इस पर पूर्व प्रबंधक अंकित भट्ट ने आपत्ति जताई। अंकित भट्ट का कहना है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी की आख्या को आधार बनाकर 12 अगस्त 2026 को आनन-फानन में चुनाव भी करा दिया गया। जब इसकी जानकारी उन्हें लगी तो 13 अगस्त को उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय और शिक्षा निदेशालय देहरादून में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर भी शिकायत डाली गई परन्तु महीनों बीत जाने के बाद भी कोई जांच नहीं हुई।
इसी मामले में जवाब मांगने के लिए स्थानीय महिला पत्रकार ज्योति किमोटी अपनी परिचित पुष्पा देवी के साथ बीते दिन मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची थी। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें कार्यालय में काफी देर तक बाहर बेंच पर बैठाए रखा गया। जब अंदर बुलाया गया तो अधिकारी ने उनकी बात सुनने के बजाय ऊंची आवाज में बात की और अभद्र टिप्पणी की। इस व्यवहार से दोनों महिलाएं आहत हैं। महिला पत्रकार ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि वह कोई निजी काम से नहीं बल्कि एक जनहित के मुद्दे पर जानकारी लेने गई थी। अगर अधिकारी को लगता है कि उनका व्यवहार सही था तो कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक की जाए। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। साथ में गई पुष्पा देवी ने भी इसी तरह के अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया है। वहीं इस पूरे प्रकरण पर मुख्य शिक्षा अधिकारी अजय कुमार चौधरी ने अपना पक्ष अलग रखा है। उनका कहना है कि प्रबंध समिति वाले मामले में पहले से ही विभागीय जांच चल रही है। उसी दिन महिला पत्रकार और एक अन्य महिला हाथ में कैमरा लेकर उनके कार्यालय में आई थी।
उन्होंने केवल इतना कहा था कि कैमरा लेकर अंदर न आएं और बाहर जाकर बात करें। उन्होंने किसी भी तरह की अभद्रता से इनकार किया है। अब मामला जिलाधिकारी के पास पहुंच गया है। महिलाओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी आम जनता और खासकर महिलाओं से इस तरह का व्यवहार न कर पाए।
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