धाकड़ धामी के विकास को चमोली जिले के पोखरी विकास खंड के इस गांव ने दिखाया आईना श्रमदान कर खुद बना रहे हैं गांव तक सड़क।

न्यूज 13 प्रतिनिधि अरुण मिश्रा चमोली

चमोली/ चमोली जिले के पोखरी विकास खंड के डुंगर गांव के ग्रामीणों ने सरकार को आईना दिखाते हुए गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए तीन किमी सड़क निर्माण का कार्य श्रमदान से शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि डुंगर गांव मुख्य सड़क मार्ग से तीन किमी की दूरी पर स्थित है। गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए ग्रामीण लगातार सरकार और शासन प्रशासन से मांग करते आ रहे थे परन्तु उनकी मांग को अनसूना किया जा रहा था।

यह भी पढ़ें 👉 अल्मोड़ा, रोड़ से लगभग 2 किलोमीटर दूर मिला अज्ञात पुरुष का नग्न शव गले में माला व हाथ में गुदा है ॐ।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यह गांव स्व. रायबहादुर पातीराम का गांव भी है। ब्रिटिश काल में समाजसेवी पातीराम को राय बहादुर की उपाधि दी थी। इसी गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़क की मांग करते आ रहे थे। डुंगर की पूर्व प्रधान सुनीता देवी ने कहा आजादी के 75 वर्षों बाद भी इस गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई। उन्होंने कहा कि गांव तक सड़क पहुंचना ग्रामीणों का लक्ष्य है और हर हाल में इसे पूरा किया जाएगा। ग्रामीणों ने आपस में धन एकत्र कर सड़क कटिंग के लिए जेसीबी भी मंगवाई है ताकि जल्द सड़क का निर्माण हो पाए। ग्राम प्रधान दीक्षा बर्वाल ने कहा कि यदि सड़क कटिंग के कार्य में विधायक अथवा क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग नहीं मिला तो आने वाले विधान सभा चुनाव में चुनाव का बहिष्कार भी किया जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉 इश्क भारी पड़ गया ममता पर 3 बच्चों की 45 वर्षीय मां 18 साल के प्रेमी के साथ हुई फरार, थाने में गिड़गिड़ाते रहे पति और बेटा।

इस बीच सतेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, अनीता देवी, प्रीति देवी, मुन्नी देवी, विजया देवी, मीना देवी, भुवनेश्वरी देवी, बसंती देवी, सुनीता देवी, राजेश्वरी देवी आदि मौजूद रहे।

क्या कहते हैं अधिकारी

पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता मनमोहन सिंह बिजल्वाण ने बताया कि ग्रामीणों की सहमति के आधार पर विभाग की ओर से चांदनीखाल से डुंगर गांव तक सड़क निर्माण के लिए सर्वे कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। प्रस्तावित सड़क की डीपीआर विभागीय स्तर से गढ़वाल मंडल के मुख्य अभियंता को भेज दी गई है।

यह भी पढ़ें 👉 कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी के नेतृत्व में जनजागृति बैठक हुई आयोजित।

मुख्य अभियंता स्तर से स्वीकृति के उपरांत डीपीआर को तकनीकी परीक्षण के लिए आईआईटी रुड़की भेजा जाएगा। अनुमोदन मिलने के बाद डीपीआर भारत सरकार को स्वीकृति के लिए प्रेषित की जाएगी। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही सड़क निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *