ऊर्जा निगम को घाटे से उभारने के लिए बिजली बिलों में बढ़ोतरी नहीं, एमडी की जिम्मेदारी तय हो : जयदीप भट्ट।

NEWS 13 प्रतिनिधि देहरादून:-

देहरादून/ उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय महामंत्री जयदीप भट्ट ने कहा कि राज्य की जनता ने बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देकर पुनः सत्ता सौंपीं लेकिन भाजपा ने राज्य की जनता को बिजली बिलों में बढ़ोतरी करके मंहगाई का गिफ्ट दिया है। भट्ट ने कहा की उत्तराखंड में अपार जल संपदा है बावजूद इसके ऊर्जा निगमों में घाटा दिखाकर बिजली दरों में बढ़ोतरी की जा रही है। विद्युत नियामक आयोग ने भी सिर्फ जनसुनवाई का बहाना बनाया और बिजली दरों में बढ़ोतरी का निर्णय देने का फैसला कर दिया जो राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के हितों पर कुठाराघात है। नियामक आयोग ने जनता के हितों मे नही बल्कि ऊर्जा निगमो के अधिकारियों के द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के हित मे फैसला देने का कार्य किया है जो कोरोना महामारी में बेरोजगार हुए जनता के हितों पर कुठारघात है।

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भट्ट ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग का कार्य था कि ऊर्जा निगमों की कार्यप्रणाली पर विशेष नजर रखते और निगमों में हो रहे भ्रस्टाचार पर ध्यान देकर राजस्व की हानि रुकवाते जिससे बिजली दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता नही पड़ती, लेकिन आयोग सिर्फ जन सुनवाई करके अपनी ड्यूटी पूरी कर देते हैं, और ऊर्जा निगमों के अधिकारियों की कारगुजारियों पर आंख बंद करके रखता है। भट्ट ने कहा कि वास्तव ऊर्जा निगम को घाटे में दिखाकर बिल बढ़ाने की योजना है जबकि ऊर्जा निगम के एमडी के पास वर्तमान में चार चार पद है तो निगम को घाटे से एमडी कैंसे उभार पायेगा, इसलिए जनता के उर अतिरिक्त राजस्व का भार डाला जा रहा है। भट्ट ने कहा कि यदि नियामक आयोग व भाजपा की सरकार वास्तव में जनता के हितों की संरक्षण की बात करती है तो ऊर्जा निगमों में किया जा रहे अनावश्यक अनुरक्षण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाकर कुछ भ्रष्ट अधिकारियों से राजस्व की वसूली करके ऊर्जा निगमों को घाटे दे उभार दे।

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भट्ट ने कहा कि ऊर्जा निगमों का कैग से ऑडिट करवाना चहिये जिससे निगमों के घाटे का वास्तविक सत्य जनता को पता चल सके। साथ ही निगम में कई योग्य अधिकारी होने के बावजूद एक व्यक्ति को अनेकों पदों पर क्यों बिठाया गया हर इससे साफ जाहिर है कि निगम पर सरकार का नियंत्रण नही है जिससे निगम को घाटा दिखाकर राज्य के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को मंहगी बिजली दी जा रही है। भट्ट ने कहा कि जब दिल्ली जैसे प्रदेश में सस्ती बिजली मिल रही है जो कोयला खरीदकर विद्युत उत्पादन कर रहे हैं, जबकि उत्तराखंड में विद्युत उत्पादन प्राकृतिक जल से हो रहा है फिर यहां बिजली मंहगी बेची जा रही है। भट्ट ने कहा कि शीघ्र राज्य के प्रबुद्ध जनों के इस विषय में विचार विमर्श करके उचित निर्णय लिया जाएगा जिसमे आगे की रणनीति तय की जाएगी जिससे राज्य के प्राकृतिक संसाधनों जल सम्पदा की लूट को बचाया जा सके।

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