रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि महाविद्यालय में टैबलेट घोटाला, खुलेआम बन रहें हैं फर्जी बिल।

NEWS 13 प्रतिनिधि रुद्रप्रयाग:-

रुद्रप्रयाग/ राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि में लगभग 2200 छात्रों को सरकार की ओर से निःशुल्क टैबलेट दिए जाने की महत्वाकांक्षी योजना पर फर्जी बिलों के द्वारे योजना को पलीता लगाने का प्रयास किया जा रही है। जिस तरह से आजकल धड़ल्ले से दुकानों में फर्जी बिल बनाने की कतारें लगी हैं। उससे साफ है कि ढाई करोड़ से ज्यादा का भुगतान इन फर्जी बिलों से होने से सरकार को 45 लाख के जीएसटी कर का भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ेगा। राज्य की पिछली धामी सरकार ने अपने कार्यकाल समाप्त होने से पहले आनन-फानन में स्कूल के साथ ही महाविद्यालयों में निःशुल्क टैबलेट बांटने की योजना बनाई थी परन्तु स्वयं खरीदने के बजाय प्रत्येक लाभार्थी बच्चे के खातों में ₹12 हजार ट्रांसफर कर दिए गए अब बच्चों ने इन्हें खरीदने में चालाकी दिखानी शुरू कर दी है। जिस पर सरकार ने विद्यालय स्तर पर जांच कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं परन्तु टेक्निकल एक्सपर्ट के ना होने के चलते जांच सही से नहीं हो पा रही है।

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चुनाव आचार संहिता के बाद महाविद्यालयों में निःशुल्क टैबलेट बांटे जाने थे जिस पर पहले शपथ पत्र और बिल लाने का फरमान जारी कर दिया गया। लेकिन यहां भी वही घपला सामने आ रहा है छात्र बिना टैबलेट खरीद के बाजारों से बिल बनाकर लगा रहे हैं। दुकानदारों के सामने भी बड़ी समस्या बिल देने की है। जबकि नियम के मुताबिक छात्र को मिलने वाला पैसा शपथ पत्र और बिल जमा करने पर ही मिलेगा ऐसे में दुकानदार भी एडवांस में बिल देकर रिस्क लेना नहीं चाह रहे हैं। जिसके चलते छात्रों ने भी बीच का रास्ता निकाल लिया है। छात्रों ने भी शार्टकर्ट के जरिये पैसा बनाने की स्कीम निकाली है। कॉलेज के जायदा तर छात्रों के पास पहले से मोबाइल हैं जिसके चलते वो नया टैबलेट लेने में कंजूसी कर रहे हैं और टैबलेट के एवज में मिलने वाली रकम को लेने का मोह नहीं त्याग नहीं पा रहे हैं जिसके चलते छात्र बाजारों से फर्जी बिल बना ले रहे हैं।

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ये बिल राशन की दुकानों से लेकर डिजाइन करके बदले जा रहे हैं कहीं-कहीं इन बिलों में जीएसटी ही नहीं है। तो कहीं आईएमईआई नंबर ही गायब है। अगर है भी तो वो पुराने मोबाइल का ही आईएमईआई नंबर चस्पा कर दिया गया है। और ये बिल बड़ी आसानी से पांच सौ से लेकर दो हजार रूपये तक में बनाए रहे हैं। अब समस्या ये है कि महाविद्यालय प्रशासन जांच की बात तो कर रहा है लेकिन जीएसटी बिलों और आईएमईआई नंबर की सत्यता को लेकर उनके पास कोई टेक्निल एक्सपर्ट नहीं है। महाविद्यालय में टैबलेट जांच देख रहे प्रो बुद्धि बल्लभ त्रिपाठी का कहना कि बिना जीएसटी और आईएमईआई नंबर वाले बिलों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 25 मार्च से इन बिलों की जांच शुरू होनी है। फर्जी पाए गए सभी बिलों को सख्ती से निरस्त कर दिया जाएगा।

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