अपने अस्तित्व को बचाने का संघर्ष करता गौरा देवी का रैणी गांव।

NEWS 13 प्रतिनिधि चमोली:-

चमोली/ चमोली जिले का रैणी गांव जहाँ से भारत के सबसे प्रसिद्ध वन संरक्षण आंदोलन ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत हुई थी अब वही रैणी गांव अपने निवासियों के रहने के लिए बहुत भयावह जगह बन गया है। राज्य के चमोली ज़िले का रैणी गांव जबरदस्त संकट की चपेट में है। जिसमें बीसियों लैंडस्लाइड भू-स्खलन और फ़्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) अकसर होते जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें 👉 : ऋषिकेश में गंगा तट पर कुर्सी पर आराम फरमाते नज़र आए अमिताभ बच्चन।

हाल ही में 1973 में चिपको आंदोलन का नेतृत्व करने वाली गौरा देवी की प्रतिमा को भी रैणी गांव से हटाकर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। शोक व्यक्त करते हुए ग्रामीणों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कभी पारिस्थितिक चेतना के लिए वैश्विक मान्यता प्राप्त करने वाले रैणी गांव को अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.