पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत की केदारनाथ धाम में नो एंट्री तीर्थ पुरोहित ने किया जबरदस्त विरोध।

NEWS 13 प्रतिनिधि रुद्रप्रयाग:-

रुद्रप्रयाग/ उतराखंड में देवस्थानम बोर्ड का गठन त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में हुआ था। उसी समय से ही लगातार तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड और त्रिवेंद्र सिंह रावत का विरोध लगातार विरोध कर रहे हैं। त्रिवेंद्र की कुर्सी जाने के पीछे यह भी एक कारण माना जाता है। पुरोहितों के आक्रोश का सामना आज पूर्व सीएम को केदारनाथ जाते समय करना पड़ा। देवस्थानम बोर्ड भंग नहीं होने से केदारनाथ व बदरीनाथ एवं गंगोत्री के साथ ही यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों में आक्रोश है। केदारनाथ पहुंचे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का तीर्थ पुरोहित ने जबरदस्त विरोध किया। त्रिवेंद्र सिंह रावत को संगम पुल से आगे नहीं बढ़ने दिया गया। तीर्थपुरोहित और हक हकूकधारियों ने इस दौरान उनके खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी भी की।

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सरकार के आश्वासन के बाद भी देवस्थानम बोर्ड व एक्ट वापस नहीं होने पर तीर्थ पुरोहितों ने सोमवार को गंगोत्री धाम बंद रखने का फैसला लिया है। गंगोत्री मंदिर समिति से जुड़े तीर्थ पुरोहितों व हक हकूकधारियों ने बैठक कर देवस्थानम बोर्ड व एक्ट के मुद्दे पर चर्चा की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 11 सितंबर को मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में 30 अक्तूबर तक देवस्थानम बोर्ड को भंग कर करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब तक सरकार ने इस विषय में कोई निर्णय नहीं लिया है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही देवस्थानम बोर्ड को भंग नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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