नेपाल सीमा के मडलक में भैया दूज को लगता है माता वैष्णवी मेला, नेपाल सीमा से लगे 12 गांवों के अलावा नेपाल के श्रृद्धालु भी करते हैं प्रतिभाग।

NEWS 13 प्रतिनिधि राहुल सिंह अधिकारी, चम्पावत:-

चम्पावत/ जिले के नेपाल सीमा से लगी दूरस्थ ग्राम सभा मडलक के जाख जिंडी में प्रति वर्ष भैया दूज के दिन माता वैष्णवी मेला धूमधाम से मनाया जाता है। इस मेले में क्षेत्र के 12 गांवों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिभाग करते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण बुंगा गांव से आने वाले देवी रथ और जत्थे होते हैं। प्राचीन मान्यतानुसार भैया दूज (बग्वाली) के दिन माता वैष्णवी अपने भाई यमराज का सिर पूजने के लिए अपने मायके जाती हैं। इस मेले का संबंध भी इसी परंपरा से है। हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में बगौटी, मडलक, मजपीपल, व दैवी का मायका कहे जाने वाले बुंगा से आने वाले चार देवी रथ विशेष आकर्षण का केन्द्र होते है। मेले में सर्वप्रथम सेलपैडू गांव से निकले वाले जत्थे द्वारा मडलकदेवी मंदिर की परिक्रमा की जाती है। जो इन देवी रथों के साथ शामिल होता है। उसके बाद सबसे पहले बगौटी गांव से देवी मां का डोला मजपीपल पहुंचता है। जहां मजपीपल व बगौटी के दोनों डोले एक साथ मिलकर मडलक देवी मां के मंदिर की ओर प्रस्थान करते है।

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दुर्गम पहाडिय़ों से रस्सों के सहारे क्षेत्रवासियों द्वारा मां के डोले को मडलक पहुंचाया जाता है, जहां दोनों डोलों द्वारा परिक्रमा किए जाने के बाद मडलक का डोला भी उनके साथ शामिल हो जाता है। बाद में सभी डोले देवी मैत देवी के मायके बुंगा की ओर प्रस्थान करते हैं। इसके बाद बुंगा से एक डोला और शामिल होता है। चारों डोलों के मायके पहुंचने पर सागर के सैल्ला के लोगों द्वारा मायके पक्ष की भूमिका निभाते हुए देवियों को अक्षत व वस्त्र भेंट किए जाने के साथ माता की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। माता वैष्णवी मेला भारत व नेपाल दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाता है। मेला क्षेत्र के गांवों में शुक्रवार से झोड़े-झुमटों का गायन शुरू होगा। महिलाएं देर रात तक गांव के सार्वजनिक स्थानों पर एकत्रित होकर झोड़ा गायन करेंगी। सामाजिक कार्यकर्ता मदन कलौनी ने बताया कि शुक्रवार को रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा। भैय्या दूज के दिन देवी रथ यात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी।

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