भराड़ीसैंण में युकेडी का उग्र प्रदर्शन, प्रर्दशनकारियों ने तोड़ डाले तीन बैरियर युवा नेता आशीष नेगी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता किए गए गिरफ्तार।

न्यूज 13 प्रतिनिधि अरुण मिश्रा चमोली

गैरसैंण,भराड़ीसैंण/ ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में बजट सत्र के पहले दिन उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। दिवालीखाल से विधानसभा की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के साथ ही वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा।

प्रमुख मांगें और ‘राजधानी’ का संकल्प

यूकेडी कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला

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1- अस्थाई राजधानी गैरसैंण को तत्काल उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित करना।

2- जमीनी मुद्दे बढ़ते पलायन पर रोक, जंगली जानवरों के हमलों से सुरक्षा और सशक्त भू-कानून।

बुनियादी सेवाएं पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में

3- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण।

 बैरिकेडिंग व धक्का-मुक्की

प्रदर्शनकारियों का जोश इतना था कि उन्होंने सुरक्षा घेरे को दरकिनार करते हुए तीन बैरियर तोड़ डाले।

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पुलिस की कार्रवाई- जब कार्यकर्ताओं ने विधानसभा भवन के करीब पहुचने की कोशिश की तो पुलिस ने वाटर कैनन का प्रयोग कर उन्हें तितर-बितर किया। इस बीच पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।

सड़क पर धरना– रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी विधानसभा से लगभग 1 किमी पहले ही सड़क पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दिए।

नेताओं के कड़े तेवर

आशीष नेगी (युवा मोर्चा अध्यक्ष) उन्होंने कहा कि 42 शहादतों के बाद मिला यह राज्य आज नेताओं की ऐशगाह बन गया है जबकि पहाड़ का आम आदमी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए दम तोड़ रहा है।

पुष्पेश त्रिपाठी (पूर्व विधायक)
उन्होंने उन विधायकों पर निशाना साधा जो पहाड़
जो पर्वतीय इलाकों से जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं।

गिरफ्तारी और

कार्रवाई

विवरण

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जानकारी

गिरफ्तार नेता

आशीष नेगी, पुष्पेश त्रिपाठी एवं सैकड़ों कार्यकर्ता

अस्थाई जेल

जंगलचट्टी और मेहलचौरी

सुरक्षा बल

भारी संख्या में पुलिस और पीएसी की तैनाती

मुख्य आरोप

सरकारी कार्य में बाधा और बैरिकेड तोड़ना
निष्कर्ष— गैरसैंण में हुआ यह प्रदर्शन राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में उक्रांद की सक्रियता और ‘पहाड़ी अस्मिता’ के प्रति लोगों के बढ़ते आक्रोश को दर्शाता है। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को फिलहाल अस्थाई जेलों में रखा गया है लेकिन आंदोलन की आंच आने वाले सत्र के दिनों में भी महसूस की जा सकती है।

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